पांढुर्णा/छिंदवाड़ा/भोपाल। [The NewsBar] आबकारी विभाग द्वारा छिंदवाड़ा जिले की नीलामी से बची हुई 21 मदिरा दुकानों तथा सौंसर की 1 मदिरा दुकान के लिए पुनः ई-टेंडर/नीलामी प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। इसके लिए 9 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छिंदवाड़ा जिले की 21 मदिरा दुकानों का कुल आरक्षित मूल्य 201 करोड़ 04 लाख 79 हजार 821 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि सौंसर की मदिरा दुकान का आरक्षित मूल्य 16 करोड़ 05 लाख 91 हजार 769 रुपये तय किया गया है।
शासन के निर्देशानुसार, आवेदक आरक्षित मूल्य से 35 प्रतिशत तक कम या अधिक राशि का टेंडर प्रस्तुत कर सकते हैं। दुकानों के आवंटन/स्वीकृति का अंतिम निर्णय संबंधित विभाग द्वारा लिया जाएगा।
ई-टेंडर प्रक्रिया के तहत आवेदन 8 अप्रैल 2026 को सुबह 9:00 बजे से प्रारंभ होकर 9 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:00 बजे तक स्वीकार किए जाएंगे। आबकारी विभाग ने इच्छुक व्यक्तियों एवं पूर्व लायसेंसधारियों से समय-सीमा में आवेदन करने की अपील की है।
प्रदेश में बड़ा बदलाव संभव: सरकार खुद बेच सकती है शराब
मध्यप्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी में अपेक्षित प्रतिस्पर्धा नहीं मिलने के चलते अब राज्य सरकार खुद शराब व्यवसाय में उतरने की तैयारी कर रही है। जानकारी के अनुसार, अब तक 12 चरणों की नीलामी के बावजूद प्रदेश में करीब 454 दुकानें ऐसी हैं, जिनके लिए उपयुक्त खरीदार नहीं मिल पाए हैं।
हाल ही में आयोजित मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में यह बड़ा प्रस्ताव सामने आया कि जिन दुकानों के लिए आरक्षित मूल्य से 30 प्रतिशत से कम बोली मिल रही है, उन्हें सरकार स्वयं संचालित करे। इस संबंध में मंत्री उदय प्रताप सिंह ने निगम बनाकर संचालन का सुझाव दिया है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने इस प्रस्ताव पर आबकारी विभाग को विस्तृत परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो मध्यप्रदेश में पहली बार सरकार सीधे तौर पर शराब बिक्री का संचालन कर सकती है।
नीलामी के आंकड़े और स्थिति
- 12वें चरण में 193 दुकानों के लिए करीब 1216.34 करोड़ रुपये के ऑफर प्राप्त हुए
- अब तक 3099 दुकानों से कुल 16,637.85 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त
- यह पिछले वर्ष के मुकाबले 34.13% अधिक है
- करीब 454 दुकानें कम बोली (30% से नीचे) के कारण फिलहाल होल्ड पर
- नई नीति से ठेकेदारों की संख्या 489 से बढ़कर 860 हो गई
आगे की रणनीति
उपसमिति ने निर्णय लिया है कि 30% से कम ऑफर स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आगामी 13वें चरण में भी केवल ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ही दुकानों का निष्पादन किया जाएगा, इस चरण में ऑक्शन नहीं होगा।
सरकार के इस संभावित कदम से न केवल राजस्व बढ़ाने की दिशा में प्रयास होगा, बल्कि शराब व्यवसाय में पारदर्शिता और नियंत्रण भी मजबूत होने की उम्मीद है।