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होर्मुज की घेराबंदी! ईरान ने मुफ्त समुद्री रास्ते पर लगाया ‘एंट्री टैक्स’, जहाजों से वसूले जाएंगे करोड़ों रुपये

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ईरान और इजराइल का युद्ध भले ही फिलहाल के लिए रुक गया हो, लेकिन एक नया संकट पैदा हो गया है. ईरान ने अब होर्मुज जलडमरूमध्‍य से जहाजों को गुजारने के लिए टोल वसूलना शुरू कर दिया है।

नई दिल्‍ली। ईरान और इजराइल के बीच युद्ध विराम होने से अगर आपको लग रहा है कि दुनिया पर आया संकट अब टल गया है तो जरा इस खबर पर नजर डालिए. इस युद्ध ने अभी तक जो नुकसान कराया, वह तो सिर्फ एक झलक थी. असली संकट तो अब शुरू हुआ है, क्‍योंकि अभी तक जो काम फ्री में हो जाता था, उसके लिए ईरान ने करोड़ों रुपये वसूलने शुरू कर दिए हैं. इसका असर दुनिया के तमाम देशों पर पड़ेगा और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत भी इस नई मुसीबत की चपेट में आ सकता है।

ब्‍लूमबर्ग के अनुसार, युद्ध के दौरान ईरान ने जितना नुकसान मिसाइलें दागकर नहीं किया, उससे ज्‍यादा चपत होर्मुज जलडमरूमध्‍य का रास्‍ता बंद करके लगा दी. यही वह वजह है, जिसने भारत सहित दुनियाभर को भारी नुकसान पहुंचाया. अब खबर है कि ईरान भले ही युद्ध खत्‍म होने के बाद इस रास्‍ते को खोल देगा लेकिन यहां से गुजरने वाले जहाजों से वह करोड़ों रुपये की फीस लेना शुरू कर दिया है. ईरान ने एक तरह से यहां टोल सिस्‍टम लागू कर दिया है, क्‍योंकि अब उसने हर कॉमर्शियल जहाज से फीस वसूलना शुरू कर दिया है।

कितने रुपये फीस वसूलेगा ईरान
ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्‍य से दुनिया का 20 फीसदी से ज्‍यादा तेल गुजरता है. भारत तो इस रास्‍ते से अपना आधे से भी ज्‍यादा तेज व गैस खरीदता है. अगर ईरान ने हमें छूट न दी तो निश्चित रूप से हमारे लिए भी तेल खरीदना और महंगा होने वाला है. मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईरान ने फिलहाल हर जहाज के गुजरने पर 20 लाख डॉलर यानी करीब 18 करोड़ रुपये फीस वसूलना शुरू कर दिया है. कुछ जहाजों ने तो यह कीमत चुकाई भी है, जिससे होर्मुज पर अब एक तरह से टोल जैसा माहौल बन गया है. हालांकि, अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि ईरान यह भुगतान किस सिस्‍टम और करेंसी में वसूल रहा है।

युद्ध ने बढ़ा दी ईरान की ताकत
ईरान यह कदम साफ बताता है कि युद्ध के बाद उसकी ताकत और बढ़ गई है. दूसरे शब्‍दों में कहें तो ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई दुनिया से करने की ठान ली है, जो दिखाता है कि होर्मुज जलडमरूमध्‍य पर उसका कितना प्रभाव है. इस रास्‍ते से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं आता, बल्कि खाने-पीने के सामान और मेटल सहित अन्‍य कमोडिटी भी बड़ी मात्रा में गुजरती है. सूत्रों का कहना है कि फिलहाल होर्मुज पर यह टोल भुगतान चुपचाप किए जा रहे हैं और कोई भी इसके बारे में खुलकर बात नहीं कर रहा है।

क्‍या कहते हैं अंतरराष्‍ट्रीय कानून
ईरान इस टोल वसूली को लेकर खुलकर बात क्‍यों नहीं कर रहा, इसकी वजह अंतरराष्‍ट्रीय कानून है. भारत ने भी एक दिन पहले ही कहा था कि यह काननू होर्मुज जलडमरूमध्‍य से गुजरने का अधिकार देता है और कोई भी इस चैनल का इस्‍तेमाल करने के लिए शुल्‍क नहीं वसूल सकता है. बावजूद इसके ईरान अगर यहां टोल वसूल रहा है तो निश्चित रूप से वह अंतरराष्‍ट्रीय कानून का उल्‍लंघन कर रहा है।

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