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कल से शुरू होगी देश की पहली ‘हाई-टेक’ जनगणना; 33 सवालों में दर्ज होगा हर घर का भूगोल और भविष्य

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नई दिल्ली। भारत में कल यानी 1 अप्रैल से जनगणना 2027 के पहले चरण का शंखनाद होने जा रहा है. इस बार की जनगणना न केवल डिजिटल होगी, बल्कि कई मायनों में ऐतिहासिक भी होने वाली है. 1931 के बाद यह पहली बार होगा जब देश में जाति आधारित डेटा भी जुटाया जाएगा. सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को कागज-कलम से मुक्त कर पूरी तरह मोबाइल और वेब आधारित बना दिया है।

जियो-मैपिंग: अब डिजिटल मैप पर होगा आपका घर
इस जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता ‘जियो-रेफरेंसिंग’ (Geo-referencing) तकनीक है।

सटीकता: हर मकान की लोकेशन सीधे डिजिटल मैप पर दर्ज की जाएगी।

फायदा: इससे एक भी घर गणना से नहीं छूटेगा और न ही किसी घर की दोबारा गिनती की आशंका रहेगी।

सेल्फ एन्यूमरेशन: खुद भरें अपने घर का ब्योरा
सरकार ने जनता की सुविधा के लिए ‘स्व-गणना’ (Self Enumeration) का विकल्प दिया है. नागरिक पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर मात्र 15 मिनट में अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन: मुखिया के नाम और मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।

भाषा चयन: 16 क्षेत्रीय भाषाओं में से अपनी पसंदीदा भाषा चुनें।

मैप मार्कर: डिजिटल मैप पर लाल मार्कर को अपने घर की सटीक लोकेशन पर सेट करें।

33 सवाल: आय, शिक्षा, घर की सुविधाओं और जाति से जुड़े 33 सवालों के जवाब दें।

सुरक्षा का ‘कवच’: परमाणु केंद्रों जैसी सिक्योरिटी
लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए सरकार ने इसे अति संवेदनशील सूचना बुनियादी ढांचा (CII) की श्रेणी में रखा है।

गोपनीयता: यह डेटा RTI (सूचना के अधिकार) के दायरे से बाहर रहेगा।

कानूनी सुरक्षा: इसे किसी अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

कड़ी कार्रवाई: डेटा लीक करने पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई होगी. इसकी निगरानी नेशनल क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर करेगा।

महत्वपूर्ण तारीखें:
पहला चरण (हाउस लिस्टिंग): 1 अप्रैल 2026 से शुरू।

दूसरा चरण (जनसंख्या गणना): फरवरी 2027।

आधिकारिक तिथि: 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि को आधार मानकर आंकड़े फाइनल होंगे।

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