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ट्रंप सरकार का ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ दांव: ताजमहल की फोटो दिखाकर भारतीयों को वापस जाने का ऑफर, ₹2.18 लाख और फ्री टिकट का लालच

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वॉशिंगटन। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने एक नई और विवादित रणनीति अपनाई है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ (स्वैच्छिक स्वदेश वापसी) स्कीम को प्रमोट करने के लिए भारत के गौरव ताजमहल की तस्वीर का इस्तेमाल किया है। इस विज्ञापन ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है, जहां कई लोग इसे भारतीयों का अपमान और संवेदनहीन कृत्य मान रहे हैं।

नकद इनाम और सम्मानजनक विदाई का वादा

इस योजना के तहत, अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे भारतीयों को एक विशेष ‘कैश प्राइज’ ऑफर किया जा रहा है। यदि कोई भारतीय स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए तैयार होता है, तो उसे 2,600 डॉलर (लगभग 2.18 लाख रुपये) नकद और घर लौटने के लिए मुफ्त हवाई टिकट दी जाएगी। सरकार का तर्क है कि जबरन डिपोर्ट करने, गिरफ्तार करने या हथकड़ी लगाने के बजाय, आर्थिक मदद के साथ सम्मानजनक विदाई देना एक बेहतर विकल्प है।

ताजमहल की तस्वीर पर क्यों मचा बवाल?

विवाद की मुख्य जड़ वह विज्ञापन है जिसे DHS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा किया। इसमें भारतीयों को लक्षित करने के लिए ताजमहल की फोटो का उपयोग किया गया। आलोचकों का कहना है कि किसी देश के सांस्कृतिक प्रतीक का उपयोग करके वहां के नागरिकों को बाहर जाने के लिए कहना बेहद अपमानजनक और ‘टोन-डेफ’ (संवेदनहीन) तरीका है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय प्रतीकों के इस्तेमाल से संदेश संबंधित देश के लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुंचता है।

पैसे बचाने की सरकारी गणित

ट्रंप प्रशासन के लिए यह स्कीम केवल प्रवासियों को निकालने का जरिया नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक फैसला भी है। आंकड़ों के अनुसार, एक व्यक्ति को जबरन डिपोर्ट करने की प्रक्रिया में अमेरिकी सरकार का खर्च लगभग 18,000 डॉलर आता है। इसके विपरीत, स्वैच्छिक वापसी की इस योजना में प्रति व्यक्ति खर्च केवल 5,000 डॉलर के आसपास बैठता है। इस तरह सरकार करोड़ों डॉलर की बचत करना चाहती है।

भारतीय प्रवासियों में बढ़ा तनाव और डर

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में करीब 7 लाख भारतीय बिना लीगल स्टेटस के रह रहे हैं। इनमें से कई ‘डंकी रूट’ के जरिए लाखों का कर्ज लेकर वहां पहुंचे हैं। ऐसे में मात्र 2 लाख रुपये लेकर वापस लौटना उनके लिए एक कठिन फैसला है। साथ ही, वहां रह रहे लीगल वीजा धारक और छात्र भी इस सख्ती से डरे हुए हैं। सबसे बड़ा डर भविष्य की पाबंदी का है; प्रवासियों को आशंका है कि यदि वे आज खुद चले जाते हैं, तो क्या भविष्य में उन पर अमेरिका आने के लिए स्थायी प्रतिबंध (Permanent Ban) लगा दिया जाएगा।

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