विज्ञापन ₹ ☎️ 8827666688

पश्चिम एशिया संकट: भारतीय एयरलाइंस को खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह, DGCA ने उड़ानों के लिए जारी किए नए सुरक्षा निर्देश

Share:

Join Whatsapp group

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट को देखते हुए भारत सरकार ने सुरक्षा के कड़े कदम उठाए हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने देश की सभी एयरलाइंस को परामर्श जारी कर खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्रों (Airspace) का इस्तेमाल करने से बचने और वैकल्पिक मार्गों की योजना तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और हवाई सुरक्षा जोखिमों के विस्तृत आकलन के बाद लिया गया है।

लंबी उड़ानों के लिए एअर इंडिया को मिली विशेष छूट

ईरान और इराक जैसे देशों के हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अब लंबे और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उड़ान के समय में काफी वृद्धि हुई है। इसी स्थिति को देखते हुए DGCA ने एअर इंडिया को ‘फ्लाइट ड्यूटी मानकों’ (Flight Duty Time Limitations – FDTL) में अस्थायी छूट प्रदान की है। यह राहत तब तक जारी रहेगी जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, ताकि पायलटों और क्रू मेंबर्स की ड्यूटी के घंटों के प्रबंधन में एयरलाइन को परेशानी न हो।

ऊर्जा संकट और बाधित हवाई मार्ग: नागरिक उड्डयन मंत्री का बयान

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा है कि सरकार लगातार एयरलाइंस के संपर्क में है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया, यूरोप और अमेरिका जाने के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट है, लेकिन वर्तमान में कई हवाई अड्डों के बंद होने से चुनौतियां बढ़ गई हैं। सरकार की प्राथमिकता उड़ानों को सुचारु रूप से संचालित करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय इस जटिल परिस्थिति से निपटने के लिए हर संभव कूटनीतिक और तकनीकी प्रयास कर रहा है।

युद्ध का प्रसार: होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा ठिकानों पर खतरा

पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों और इजराइल की जवाबी कार्रवाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों को बाधित कर दिया है। ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों ने न केवल विमानन क्षेत्र बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

error: Copy not allowed