दिव्य प्रकाश के परिवार और स्थानीय लोग इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। परिजनों का कहना है कि यह सफलता बच्चे की मेहनत, लगन और तकनीकी समझ का परिणाम है, जिसने पूरे इलाके का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया।
जानकारी के अनुसार, नासा ने प्रतिभाशाली छात्रों के लिए ऑनलाइन वल्नरेबिलिटी डिसक्लोजर प्रोग्राम आयोजित किया था, जिसमें छात्रों को एजेंसी की वेबसाइट और फेसबुक लिंक जैसी डिजिटल संपत्तियों की कमियों का पता लगाकर रिपोर्ट करना था। रांची के कैंब्रियन स्कूल के दिव्य प्रकाश ने नासा के फेसबुक लिंक को हैक कर उसमें सुरक्षा खामियों की जानकारी दी और इसे सुधारने में मदद की। इसके साथ ही उन्होंने अपने पिता का लिंक जोड़कर प्रैक्टिकल उदाहरण भी पेश किया।
इस उपलब्धि के साथ दिव्य प्रकाश अब सबसे कम उम्र के छात्र बन गए हैं, जिन्हें हॉल ऑफ फेम और लेटर ऑफ रिकॉग्निशन जैसे प्रतिष्ठित दोहरे सम्मान से नवाजा गया है। इससे पहले 16 साल के एक छात्र को ही हॉल ऑफ फेम का सम्मान मिला था।
दिव्य प्रकाश के पिता अब इस रिकॉर्ड को Guinness World Records में दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि यह 13 साल की उम्र में सबसे कम उम्र में हासिल की गई तकनीकी उपलब्धि है।
यह उपलब्धि न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो तकनीकी दक्षता और डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रही है।