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CBSE का नया सिलेबस लागू, अब स्कूल में ही होगी JEE-NEET की तैयारी; डमी विद्यालयों पर कसेगा शिकंजा

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(The NewsBar) सीबीएसई ने नौवीं व 10वीं के लिए बड़े पाठ्यक्रम सुधार लागू करने का फैसला किया है। नए ढांचे में तीसरी भाषा अनिवार्य करने, गणित और विज्ञान में एडवांस स्तर के विकल्प देने और एआई व कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को औपचारिक मूल्यांकन में शामिल करने जैसे कदम उठाए गए।

नौवीं-दसवीं के पाठ्यक्रम में बड़े सुधार

  • सीबीएसई 2026-27 से नौवीं-दसवीं के पाठ्यक्रम में बड़े सुधार लागू करेगा।
  • तीसरी भाषा अनिवार्य होगी; गणित-विज्ञान में एडवांस स्तर का विकल्प मिलेगा।
  • एआई और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग औपचारिक मूल्यांकन का हिस्सा बनेंगे।
  • ये बदलाव डमी स्कूलों पर अंकुश लगाएंगे और कोचिंग निर्भरता घटाएंगे।
  • एनईपी 2020 पर आधारित, ये सुधार समझ और कौशल-आधारित शिक्षा पर जोर देते हैं।

शिक्षा प्रणाली अधिक व्यावहारिक होगी
ये सुधार भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे। यह छात्रों को रटने के बजाय समझ और कौशल विकसित करने में मदद करेगा, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होंगे। कोचिंग पर निर्भरता कम होगी और स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी।

खबर विस्तार से.. .

नई दिल्ली। [The NewsBar]  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने डमी स्कूलों के बढ़ते ट्रेंड पर लगाम लगाने और कोचिंग पर निर्भर होने के बजाय स्कूल शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नौवीं व 10वीं के लिए बड़े पाठ्यक्रम सुधार लागू करने का फैसला किया है।

नए ढांचे में तीसरी भाषा अनिवार्य करने, गणित और विज्ञान में एडवांस स्तर के विकल्प देने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) व कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को औपचारिक मूल्यांकन में शामिल करने जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे छात्र स्कूल में ही प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं जैसे जेईई, नीट की तैयारी कर सकें और अलग से कोचिंग की जरूरत कम हो।

छठवीं में तीसरी भाषा अनिवार्य
यह पूरा बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)- 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ) 2023 के विजन पर आधारित है, जिसमें रटने की बजाय समझ, स्किल और एप्लीकेशन आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है। इसका पहला बड़ा असर वर्ष 2028 के बोर्ड परीक्षा पैटर्न में दिखाई देगा।

नई व्यवस्था में तीन-भाषा फॉर्मूला सबसे अहम बदलाव के रूप में सामने आया है। सत्र 2026-27 से छठवीं में तीसरी भाषा अनिवार्य होगी और इसे सत्र 2030-31 तक चरणबद्ध तरीके से 10वीं तक लागू किया जाएगा। हर विद्यार्थियों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी और 10वीं बोर्ड में बैठने के लिए भाषाओं को पास करना जरूरी होगा। हालांकि दिव्यांग छात्रों को इसमें छूट दी गई है।

सीबीएसई चेयरपर्सन राहुल सिंह के अनुसार यह ढांचा अभी विकसित हो रहा है और फीडबैक के आधार पर इसमें सुधार किया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि इन बदलावों से स्कूल शिक्षा अधिक व्यावहारिक और प्रतिस्पर्धी बनेगी, जिससे डमी स्कूलों की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा और छात्र मुख्यधारा की पढ़ाई से जुड़ेंगे।

एडवांस स्तर के लिए 25 अंकों की अतिरिक्त परीक्षा होगी
गणित और विज्ञान की पढ़ाई को भी पूरी तरह नया रूप दिया गया है। नौवीं से इन विषयों में स्टैंडर्ड और एडवांस दो स्तर होंगे। सभी विद्यार्थियों के लिए सामान्य पेपर होगा, जबकि एडवांस चुनने वालों को 25 अंकों की अतिरिक्त परीक्षा देनी होगी, जिसमें हाई-आर्डर थिंकिंग (उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल) और एनालिटिकल (विश्लेषणात्मक) सवाल होंगे।

इन अंकों को कुल प्रतिशत में नहीं जोड़ा जाएगा, बल्कि मार्कशीट में अलग से योग्यता के तौर पर दर्शाया जाएगा। वर्ष 2028 से विद्यार्थी दो एडवांस विषय चुन सकेंगे। टेक्नोलाजी आधारित लर्निंग को बढ़ावा देते हुए बोर्ड ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी मुख्यधारा में शामिल किया है।

तीसरी से आठवीं तक इसे गतिविधि आधारित तरीके से पढ़ाया जाएगा, जबकि 2027-28 से माध्यमिक स्तर पर इसे विषय के रूप में लागू किया जाएगा। 2029 तक इनका बोर्ड परीक्षा में औपचारिक मूल्यांकन भी शुरू हो जाएगा।

स्कूलों को बैगलेस डे और हल्के टाइमटेबल लागू करने के निर्देश
पढ़ाई को केवल विषयों तक सीमित न रखते हुए इंटरडिसिप्लिनरी (अंतःविषय) अप्रोच को भी शामिल किया गया है। नौवीं में कौशल विषय के तौर पर समाज में व्यक्ति और 10वीं में पर्यावरण शिक्षा जैसे नए विषय जोड़े जाएंगे। इसके साथ ही व्यवसायिक शिक्षा, स्थानीय कौशल और कार्य आधारित शिक्षा को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

स्कूलों को बैगलेस डे और हल्के टाइमटेबल लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पढ़ाई का दबाव कम हो और सीखने का अनुभव बेहतर बने। कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और कल्याण को भी अब कोर लर्निंग का हिस्सा बनाया गया है।

ऐसी होगी मूल्यांकन प्रणाली
आंतरिक मूल्यांकन को चार हिस्सों में आवधिक परीक्षण, एकाधिक मूल्यांकन, पोर्टफोलियो और विषय संवर्धन में बांटा गया है, जिनका समान वेटेज होगा।
बोर्ड परीक्षा में अब करीब 50 प्रतिशत सवाल केस स्टडी, डेटा एनालिसिस और एप्लीकेशन आधारित होंगे।

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