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POK में जिहादी संगठनों का नया पैंतरा, शिक्षा के नाम पर बच्चों को बना रहे आतंकी; गरीब परिवारों को दे रहे मुफ्त राशन

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HighLights

  • जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा बच्चों को जिहाद के लिए भर्ती कर रहे।
  • पाकिस्तान, PoK में शिक्षा के नाम पर आतंकी प्रशिक्षण दिया जा रहा।
  • गरीब परिवारों के 7-13 वर्ष के बच्चों को निशाना बनाया जा रहा।

जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के नाम पर बच्चों को जिहादी बनाने का अभियान चला रहे हैं।

श्रीनगर। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने इस्लाम और कश्मीर जिहाद के नाम पर आतंकियों की नयी फौज तैयार करने के लिए शिक्षा के नाम पर छात्रों को भर्ती करने का अभियान चलाया है।

यह अभियान पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में चलाया जा रहा है और इसके तहत विज्ञापन जारी कर अभिभावकों से कहा जा रहा है कि वह अपने बच्चों को उनके संस्थानों में दाखिल कराएं जहां उन्हें हर सुविधा मिलेगी, इस्लाम की मान्यताओं के मुताबिक जंगी तालीम भी दी जाएगी अभिभावकों से कहा जा रहा है कि उनके बच्चों को मुफ्त खाना मिलेगा और उन्हें हर माह नकद भत्ता भी दिय जाएगा।

स्कूलों में जिहादी भाषण
सिर्फ यही नहीं जिहादी संगठनों के मॉटिवेटर गुलाम जम्मू-कश्मीर में सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में जाकर जिहादी भाषण कर रहे हैं, बच्चों के लिए वहां नाटक और संभाषण प्रतियोगिताएं भी आयोजित कर रहे हैं, जो कश्मीर में मारे गए आतिकयों को महिमामंडन और कश्मीर में मुस्लिमों पर उत्पीड़न की झूठी कहानियाें पर केंद्रित होती हैं।

संबंधित सूत्रों ने बताया कि स्कूली छात्रों को जिहादी पाठ पढ़ाने और उनमें आतंकी मानसिकता विकसित करने में हालांकि सभी आतंकी संगठन जुटे हुए हैं, लेकिन जैश ए मोहम्मद अन्य संगठनों के मुकाबले ज्यादा सक्रिय है।

स्कूलों में बढ़ा रहा पैठ
लश्कर-ए-तैयबा भी इसी काम में जुटा है, लेकिन गुलाम जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में उसकी गतिविधियां सिर्फ अपने संबंधित संगठनों द्वारा संचालित स्कूलों तक सीमित हैं। जैश-ए-मोहम्मद वहां सरकारी, गैर सरकारी और अन्य स्कूलों में भी अपनी पैठ बड़ा रहा है।

वह छात्रों के लिए स्कूलों से बाहर भी जिहादी कार्यक्रम संचालित कर रहा है। उन्होंने बताया कि गुलाम जम्मू-कश्मीर में पहले इन आतंकी संगठनों की गतिविधियां मजहबी जलसों-रैलियों और आतंकी शिविरों तक सीमित थी, लेकिन बीते सितंबर के बाद अब उन्होंने स्कूलों में भी अपनी गतिविधियों को विस्तार देना शुरू कर दिया है।

गुलाम जम्म-कश्मीर मे कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को उनके मौजूदा स्कूल से हटाकर, बहावलपुर, लाहौर, मुरीदके औ कराची में इन आतंकी संगठनों के तथाकथित स्कूलों में भेजा है। यह संगठन मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजाेर परिवारों केा निशाना बना रहे हैं।

अपने मकसद में कामयाब
उन्होंने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर की गतिविधियों को पाकिस्तानी सरकार और सेना ने गुलाम जम्मू कश्मीर में कश्मीर जिहाद के प्रति स्थानीय लोगों के होते मोहभंग को देखते हुए बढ़ाया है और वह अब किसी हद तक अपने मकसद में कामयाब भी होने लगी है।

अन्यथा, गुलाम जम्मू कश्मीर से इन दोनों संगठनों में आतंकियों की भर्ती लगातार घट रही थी और लोग खुलकर इन संगठनों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, इनके ट्रेनिंग कैंप बंद करने की मांग कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद ने बाल जिहादियों को तैयार करने के लिए सात से 13 वर्ष के बच्चों को अपने कथित शिक्षण संस्थानों में भर्ती करने का अभियान चलाया है। इसमें वह अभिभावकों को लालच दे रहा है कि आपके बच्चों को मुफत खाना, मासिक भत्ता, अच्छे अध्यापक, चिकित्सा सुविधा मिलेगी।

उसने जो पोस्टर जारी किए हैं, उसमें वह गरीबों के लिए, मुजाहिदीन जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा गया कि छात्र की न्यूनतम आयु सात वर्ष और अधिकतम 13 वर्ष होनी चाहिए।

वर्ष 2010 में पाकिस्तान से लौट मुख्यधारा में शामिल हुए एक पूर्व कश्मीरी आतंकी ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि जैश ए मोहम्मद और लश्कर पूरे पाकस्तान में ऐसे परिवारों को टारगेट करते हैं जो गरीब होते हैं।

वह अपने बच्चों को अच्छे की उम्मीद में इनके हवाले कर देते हैं, लेकिन यह बच्चे बाद में किलिंग मशीन बन जाते हैं। इनके स्कूलों में इनकी मर्जी के बिना कोई दाखिल नही हो सकता। किसी बच्चे के अभिभावक भी नहीं । इन स्कूलोे में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र के लिए हर साल किसी न किसी तरह की जिहाद ट्रेनिंग या प्रैक्टिस में शामिल होना जरुरी होता है।

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