प्रयागराज कुम्भ में माला बेचते वायरल हुई मोनालिसा ने शादी कर ली… ये तो सोशल मीडिया में वायरल है ही..इस शादी के वैसे तो सभी सोशल मीडिया टीकाकार (मैं भी ) “बेगानी शादी के दीवाने अब्दुल्लाह” ही हैं मगर फिर भी…. जो कहानियां सामने आ रही हैं, उस पर चर्चा बेशक हो सकती है…विजातीय और वो भी मुस्लिम युवक से क्यूँ उसने शादी की…क्यूँ जगह केरल चुनी…अचानक मिली शोहरत ने क्या इसका दिमाग़ ख़राब कर दिया…? क्या ये सोशल मीडिया से मिले देवत्व को संभाल नहीं पा रही है..इस भाव के कई कंटेट आपने देखे होंगे..मगर यदि गौर से देखेंगे तो इस शादी में भविष्य का आर्थिक नियोजन कम और भावनात्मक सुरक्षा की चाह ज्यादा है.. वो जिस पृष्ठभूमि से आती है,वहां से उठकर चमक दमक की दुनिया में आचरण/ व्यवहार कैसा हो, ये सलाह देने वाला भी कोई उसके साथ नहीं था…जो मेरी जानकारी है उसके मुताबिक़ बचपन से ही प्यार को तरसती रही..इसकी माँ जो अभी नज़र आती हैं, संभवतः वो असली नहीं है, पिता की दूसरी पत्नी हैं.. परिवार से वैसा प्रेम कभी मिला नहीं, जो वांछित था..अचानक शोहरत मिली, तो पूरा परिवार इसे ATM समझने लगा… शादी के विषय को लेकर उसका परिवार वालों से भागना साफ़ इस बात का इशारा दे रहा है कि वो उनसे दूर ही रहना चाहती है… जो मेंटोर सबसे पहले मिले, वो भी विवादों से घिरे हुए थे…. उसके पास ऐसा कोई कंधा नहीं था, जो न केवल सुरक्षा का इत्मीनान देता बल्कि आवश्यक सलाह भी देता.. शायद इसी वज़ह से वो कोई स्थाई आसरा तलाश रही थी, जो उसे फरमान खान के बतौर मिला..ये और बात है कि खान साहब कितने ईमानदार होंगे इस रिश्ते के प्रति और कब तक अल्लाह इनकी नीयत साबुत रखेंगे, ये कह पाना मुश्किल है…अचानक मिली शोहरत पानी के बुलबुले की तरह तो नहीं लेकिन छोटे से बलून जैसी ज़रूर होती है..ठीक से सहेजा नहीं गया, तो हलकी सी रगड़ भी उसे फोड़ देती है.. ऐसे में जब ये कोई कर्रा इश्क़ नहीं है, सिर्फ एक आलंबन है, उम्मीद और दुआ यही कि इसकी उम्र लम्बी रहे वर्ना इसका जीवन और कैरियर दोनों अस्त-व्यस्त हो जाएंगे…