नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए नई दिल्ली स्थित 24 अकबर रोड का ऐतिहासिक दफ्तर 28 मार्च तक खाली करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में संपदा विभाग की ओर से औपचारिक नोटिस जारी कर दिया गया है।
करीब 48 वर्षों तक कांग्रेस का मुख्यालय रहे इस पते से पार्टी ने देश की राजनीति में कई बड़े फैसले लिए और ऐतिहासिक जीत दर्ज कीं। हालांकि, इस साल की शुरुआत में पार्टी ने अपना नया मुख्यालय 9A कोटला मार्ग स्थित इंदिरा भवन में शिफ्ट कर लिया था, लेकिन इसके बावजूद 24 अकबर रोड स्थित दफ्तर का उपयोग अब भी महत्वपूर्ण बैठकों के लिए किया जा रहा था।
सरकार के इस निर्देश के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और इसे लेकर विवाद की स्थिति भी बन सकती है।
ऐतिहासिक महत्व
24 अकबर रोड का भवन ब्रिटिश काल में प्रसिद्ध वास्तुकार एडविन लुटियंस द्वारा 1911 से 1925 के बीच निर्मित कराया गया था। यह लुटियंस दिल्ली के प्रमुख बंगलों में से एक है।
आजादी के बाद यह बंगला म्यांमार (तब बर्मा) के राजनयिक आवास के रूप में इस्तेमाल हुआ, जिसे “बर्मा हाउस” नाम दिया गया था। बाद में 1978 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने इसे अपना मुख्यालय बनाया।
यहीं से पार्टी ने 1980 में सत्ता में वापसी की रणनीति तैयार की। इसके बाद राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह के दौर में भी यह कार्यालय कांग्रेस की राजनीति का केंद्र बना रहा।
क्यों दिया गया नोटिस?
हालांकि कांग्रेस ने नया मुख्यालय शुरू कर दिया है, लेकिन पुराने दफ्तर को खाली नहीं करने पर अब संपदा विभाग ने कार्रवाई की है। आदेश के मुताबिक 28 मार्च तक परिसर खाली करना अनिवार्य होगा।
इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव बढ़ने की संभावना है।