प्रस्तावित संशोधनों के तहत अब सोशल मीडिया जैसे मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स पर नॉन-पब्लिशर यूजर्स द्वारा शेयर की गई न्यूज और करंट अफेयर्स की सामग्री भी नियामकीय ढांचे के अंतर्गत लाई जाएगी। यानी अब केवल रजिस्टर्ड पब्लिशर्स ही नहीं, बल्कि आम यूजर्स द्वारा साझा की गई खबरें भी नियमों के दायरे में आएंगी।
सरकार ने इन संशोधनों पर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं और इसके लिए 14 अप्रैल 2026 तक की समय सीमा तय की गई है।
ड्राफ्ट के अनुसार, आईटी नियमों के भाग III की प्रयोज्यता को स्पष्ट करते हुए यह प्रस्ताव है कि ऐसे मध्यस्थ जो गैर-पब्लिशर यूजर्स की ओर से पोस्ट की गई न्यूज सामग्री को होस्ट करते हैं, वे भी नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे। इससे डिजिटल मीडिया के आचार संहिता से जुड़ा नियामक ढांचा और मजबूत होगा।
इसके अलावा, भाग II में नया नियम 3(4) जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसके तहत मध्यस्थों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत अपने ‘ड्यू डिलिजेंस’ दायित्वों का पालन करें। इसमें मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश, परामर्श, SOPs और निर्देशों का अनुपालन शामिल होगा।
ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि डेटा संरक्षण से जुड़े प्रावधान अन्य लागू कानूनों के साथ समान रूप से प्रभावी रहेंगे।
साथ ही, नियम 14 के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। अब यह समिति न केवल प्राप्त शिकायतों पर विचार करेगी, बल्कि उन मामलों पर भी कार्रवाई कर सकेगी जिन्हें मंत्रालय सीधे उसके पास भेजेगा।
इस प्रस्तावित संशोधन से डिजिटल कंटेंट के नियमन में कार्यपालिका की भूमिका और अधिक मजबूत होने की संभावना है, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ेगी।