एक ईरानी महिला ने कहा —
“या तो आपको उनसे लड़ना होगा…
या फिर उनका गुलाम बनना होगा।”
उन्होंने बताया —
उन्होंने गुलाम न बनने का रास्ता चुना।
महिला बोली —
“मैं यूरोप में रह रही थी…
लेकिन जंग के दूसरे ही दिन वापस आ गई।”
क्योंकि —
अपनी सरज़मीन पर खड़े होना
सबसे बड़ा फर्ज़ होता है।
उन्होंने कहा —
“यह हमारा वतन है…
और मुश्किल वक्त में
इसे अकेला नहीं छोड़ते।”
जब देश संकट में हो…
तो कुछ लोग दूर भागते हैं,
और कुछ लोग
वापस लौटकर इतिहास लिखते हैं।