विज्ञापन ₹ ☎️ 8827666688

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक: अब WhatsApp पर ठगों के ‘डिवाइस’ ही होंगे ब्लॉक

Share:

Join Whatsapp group

 

नई दिल्ली। भारत में तेजी से बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (I4C) की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने मैसेजिंग दिग्गज WhatsApp को निर्देश दिया है कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस की यूनिक आईडी (Device IDs) को सीधे ब्लॉक किया जाए। अब तक साइबर ठग पुराने अकाउंट बंद होने पर नए नंबर से तुरंत सक्रिय हो जाते थे, लेकिन अब डिवाइस स्तर पर रोक लगने से उनका काम करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

सरकार की इस योजना के तहत न केवल डिवाइस आईडी, बल्कि मोबाइल के IMEI नंबर और MAC एड्रेस जैसे विशिष्ट पहचान चिह्नों का उपयोग कर अपराधियों को ट्रैक और बैन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सरकार WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स पर Skype की तरह उन्नत सुरक्षा फीचर्स लागू करने पर भी विचार कर रही है। नए IT Rules 2021 के तहत एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि डिलीट किए गए संदिग्ध अकाउंट्स का डेटा कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच एजेंसियों को ठोस सबूत जुटाने में मदद मिल सके।

प्रशासन अब उन मैलिशियस APK फाइल्स और फर्जी ऐप्स की पहचान करने की दिशा में भी काम कर रहा है, जिनके जरिए ठग लोगों के फोन का एक्सेस प्राप्त करते हैं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है। इस स्कैम में अपराधी अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और पीड़ित को फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर घंटों तक कैमरे के सामने रहने (डिजिटल अरेस्ट) को मजबूर करते हैं, जिसके बाद उनसे मोटी रकम वसूली जाती है।

सरकारी विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे हर नागरिक का एक आधार नंबर होता है, वैसे ही हर फोन की ‘डिवाइस आईडी’ उसकी अपनी पहचान होती है। इस पहचान को ब्लॉक करने से अपराधी उसी फोन का दोबारा इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। सरकार की इस सख्ती से न केवल करोड़ों WhatsApp यूजर्स की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में भी बड़ी कामयाबी मिलने की उम्मीद है।

error: Copy not allowed