THE NewsBar | शुभम नांदेकर, भोपाल।
मध्य प्रदेश सरकार राज्य के श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार छह पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर उनकी जगह एक समग्र “सिंगल लेबर एक्ट” लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य श्रमिकों और उद्योग-व्यापार जगत के बीच संतुलन स्थापित करना, रोजगार बढ़ाना और कारोबार को अधिक सरल बनाना है।
राज्य सरकार ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की है। समिति में प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी, श्रम सचिव रघुराज एमआर, विधि सचिव मुकेश कुमार और भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा शामिल हैं। प्रारूप पर कई दौर की चर्चा हो चुकी है और मसौदा अंतिम चरण में बताया जा रहा है।
क्या होंगे बड़े बदलाव?
1. रातभर खुल सकेंगे थिएटर और रेस्टोरेंट
वर्तमान में मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1958 के तहत थिएटर रात 1 बजे तक और रेस्टोरेंट 1:30 बजे तक ही संचालित किए जा सकते हैं। नए एक्ट में इन समय सीमाओं को हटाने का प्रस्ताव है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान 24 घंटे संचालित हो सकेंगे।
2. कर्मचारी खुद तय कर सकेंगे साप्ताहिक अवकाश
अब तक अधिकांश प्रतिष्ठानों में साप्ताहिक अवकाश नियोक्ता तय करते थे। नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों को सप्ताह में एक अनिवार्य अवकाश मिलेगा और उसे तय करने में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। काम के घंटे भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाएंगे।
3. दुकान खोलने के लिए इंस्पेक्टर राज खत्म
नई दुकान या प्रतिष्ठान शुरू करने के लिए निरीक्षण और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता कम होगी। प्रस्ताव के अनुसार केवल ऑनलाइन आवेदन या सूचना देकर व्यवसाय शुरू किया जा सकेगा। हाल के संशोधनों में राज्य सरकार पहले ही डिजिटल रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन निरीक्षण प्रणाली लागू कर चुकी है।
4. डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था
नए कानून के तहत पंजीयन, निरीक्षण और अनुपालन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होने की संभावना है। इससे भ्रष्टाचार और अनावश्यक सरकारी हस्तक्षेप कम होगा तथा व्यापारियों को राहत मिलेगी।
किन कानूनों का होगा विलय?
प्रस्तावित एक्ट के लागू होने पर निम्न प्रमुख कानून समाप्त हो सकते हैं-
- मप्र इंडस्ट्रियल एम्प्लॉयमेंट (स्टैंडिंग ऑर्डर्स) अधिनियम, 1961
- मप्र औद्योगिक संबंध अधिनियम, 1960
- मप्र दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1958
- मप्र श्रम कल्याण निधि अधिनियम
- मप्र असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम, 2003
- मप्र इन्सॉल्वेंसी अधिनियम, 1946
इन सभी प्रावधानों को एकीकृत कर एक व्यापक कानून बनाया जाएगा।
केंद्र के लेबर कोड से मिलेगा तालमेल
केंद्र सरकार पहले ही 29 श्रम कानूनों को समाहित कर चार प्रमुख लेबर कोड लागू कर चुकी है, जिनमें वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध तथा कार्यस्थल सुरक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। मध्य प्रदेश का नया कानून इन्हीं केंद्रीय श्रम सुधारों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
रोजगार और निवेश पर क्या होगा असर?
सरकार का मानना है कि श्रम कानूनों के सरलीकरण से निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि 24×7 संचालन की अनुमति मिलने से सेवा क्षेत्र, पर्यटन, होटल, आईटी और रिटेल सेक्टर को बड़ा लाभ मिल सकता है। वहीं श्रमिक संगठनों का एक वर्ग इस बात पर जोर दे रहा है कि श्रमिकों की सुरक्षा, कार्य घंटे और सामाजिक सुरक्षा के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
यदि प्रस्तावित “सिंगल लेबर एक्ट” लागू होता है तो यह मध्य प्रदेश के श्रम और व्यापार क्षेत्र में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा। इससे एक ओर उद्योगों को संचालन में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के अधिकारों और सुविधाओं को नए ढांचे में परिभाषित किया जाएगा। अब सबकी नजर सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले अंतिम मसौदे और उसके प्रावधानों पर टिकी है।