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मध्य प्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप पर लगेगा कानूनी ‘टैग’! रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी, बच्चों को मिलेगा संपत्ति में पूरा हक; जानिए नए नियम.. .

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THE NewsBar | भोपाल। अगर आप मध्य प्रदेश में अपने पार्टनर के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं या भविष्य में ऐसा सोच रहे हैं, तो जल्द ही आपको अपने रिश्ते का सरकारी रजिस्ट्रेशन कराना पड़ सकता है। राज्य सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और इसके ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। अगर यह कानून लागू होता है, तो मध्य प्रदेश उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन जाएगा।

बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन नहीं चलेगा!

यूसीसी ड्राफ्ट के मुताबिक, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को जिला प्रशासन के पास अपने रिश्ते का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यानी अब “सिर्फ साथ रहना” पर्याप्त नहीं होगा, रिश्ते को कानूनी पहचान भी दिलानी होगी।

सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और रिश्तों में पारदर्शिता आएगी।

सबसे बड़ा फायदा: बच्चों को मिलेगा वैध वारिसाना हक

ड्राफ्ट का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित प्रावधान यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को अब किसी भी तरह से “अवैध” नहीं माना जाएगा। उन्हें माता-पिता की संपत्ति में वही अधिकार मिलेंगे जो शादीशुदा दंपति के बच्चों को प्राप्त होते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रावधान हजारों बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

सिर्फ लिव-इन ही नहीं, शादी और तलाक के नियम भी होंगे एक समान

यूसीसी के प्रस्तावित ढांचे में चार प्रमुख विषय शामिल हैं-

  • सभी धर्मों के लिए विवाह के समान नियम
  • तलाक और भरण-पोषण के एक जैसे प्रावधान
  • बेटा-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार
  • लिव-इन रिलेशनशिप का कानूनी नियमन

कांग्रेस ने उठाए सवाल

विपक्षी कांग्रेस ने लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार से जुड़ा विषय है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि सरकार को पहले समाज में व्यापक चर्चा और सहमति बनानी चाहिए।

अब जनता की राय पर नजर

यूसीसी मसौदा तैयार करने वाली समिति फिलहाल जनता और विभिन्न संगठनों से सुझाव ले रही है। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इसके बाद कानून का अंतिम स्वरूप सामने आएगा।

अगर यह कानून लागू होता है, तो मध्य प्रदेश में रिश्तों की परिभाषा और उनके कानूनी अधिकारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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