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सौंसर गैस एजेंसी में अनियमितता उजागर: 92 घरेलू सिलेंडर कम, जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज – पांढुर्णा मुख्यालय में जांच का अभाव बना चर्चा का विषय

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पांढुर्णा मुख्यालय में जांच का अभाव बना बड़ा सवाल

@ शुभम नांदेकर, पांढुर्णा। [The NewsBar]
कलेक्टर कार्यालय पांढुर्णा के निर्देश पर जिले में गैस एजेंसियों की चल रही जांच के दौरान सौंसर क्षेत्र में एक बड़ी अनियमितता उजागर हुई है। मनीष गैस एजेंसी पर की गई संयुक्त जांच में 14.2 किलोग्राम के 92 घरेलू गैस सिलेंडर स्टॉक से कम पाए गए, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

यह कार्रवाई एसडीएम सौंसर सिद्धार्थ पटेल, एसडीओ (आपूर्ति) श्रीमती रीता मस्कोले, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जितेन्द्र शिल्पी एवं तहसीलदार अडमे की संयुक्त टीम द्वारा की गई। जांच के दौरान एजेंसी के भौतिक स्टॉक और अभिलेखों का बारीकी से मिलान किया गया, जिसमें यह गंभीर गड़बड़ी सामने आई।

जांच दल के अनुसार, एजेंसी द्वारा गैस प्रदाय एवं वितरण आदेश 2000 की कंडिका 3(3) एवं 3(4) का स्पष्ट उल्लंघन किया गया है। मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित संचालक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी इस प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।


पांढुर्णा मुख्यालय में जांच का अभाव बना बड़ा सवाल

जहां एक ओर सौंसर क्षेत्र के अधिकारियों द्वारा सक्रियता दिखाते हुए जांच और कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय पांढुर्णा में अब तक किसी भी गैस एजेंसी की गंभीर जांच नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि मुख्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारी केवल बैठकों तक सीमित रह गए हैं। जमीनी स्तर पर कार्रवाई का अभाव साफ नजर आ रहा है। सूत्रों की मानें तो कुछ गैस एजेंसियों द्वारा अधिकारियों के साथ “सेटिंग” कर ली जाती है—जिसमें छोटे-मोटे “मेंटेनेंस” या निजी सुविधाएं उपलब्ध कराकर जांच से बचने का प्रयास किया जाता है।

यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि फोन कॉल पर सिलेंडर की होम डिलीवरी जैसी सुविधाएं देकर अधिकारियों को संतुष्ट किया जाता है, जिसके चलते कालाबाजारी या अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा।


जिले में समान कार्रवाई की उठी मांग

सौंसर में हुई इस कार्रवाई के बाद अब आमजन और उपभोक्ताओं के बीच यह मांग तेज हो गई है कि जिले के सभी क्षेत्रों, विशेषकर पांढुर्णा मुख्यालय की गैस एजेंसियों की भी निष्पक्ष और व्यापक जांच की जाए
लोगों का कहना है कि यदि एक क्षेत्र में इतनी बड़ी अनियमितता सामने आ सकती है, तो अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति की गंभीरता से जांच जरूरी है।


प्रशासन के सामने चुनौती

यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। एक ओर जहां सौंसर की कार्रवाई सराहनीय मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर पांढुर्णा में जांच का अभाव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या मुख्यालय स्तर पर भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई देखने को मिलती है या नहीं।

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