7 दिन में मरम्मत शुरू करने का आश्वासन, नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
THE NewsBar | सौंसर। बजाज से राजना तक जाने वाली सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर आखिरकार जनता का आक्रोश सड़क पर उतर आया। वर्षों से गड्ढों में तब्दील इस मार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं और प्रशासनिक उदासीनता के विरोध में मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव सोपान कोहले के नेतृत्व में युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय, सौंसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बजाज–राजना मार्ग अब सड़क कम और गड्ढों की श्रृंखला ज्यादा बन चुका है। रोजाना इस मार्ग से स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, किसान, मजदूर, व्यापारी और आम नागरिक आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर हालत के कारण हर सफर जोखिम भरा हो गया है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं, जबकि बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो गई है।
धरने को संबोधित करते हुए सोपान कोहले ने कहा कि शासन-प्रशासन जनता की मूलभूत समस्याओं के प्रति पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। अनेक बार शिकायतों और मांगों के बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण या मरम्मत नहीं हुई तो किसी बड़ी दुर्घटना की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन की होगी।
धरना-प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के एसडीओ सुधांशु चौरसिया मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। उन्होंने 7 दिनों के भीतर सड़क मरम्मत कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया। विभाग के इस आश्वासन के बाद जनहित को देखते हुए प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
हालांकि, युवा कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन केवल स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। प्रदेश सचिव सोपान कोहले ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय-सीमा में सड़क मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ तो लोक निर्माण विभाग कार्यालय के भीतर और बाहर व्यापक एवं उग्र जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
जनता का सवाल
आखिर कब तक लोग टूटी सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहेंगे? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि जनता समय पर टैक्स देती है तो उसे सुरक्षित सड़क जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल रही? अब यह केवल सड़क मरम्मत का मुद्दा नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और प्रशासन की जवाबदेही का भी प्रश्न बन चुका है।
धरना-प्रदर्शन में विजय घाटोड, दीपक इंगोले, निवृत्ति कोहले, पवन उपासे, रत्नाकर ठाकरे, निखिल राय, मनीष सोमकुवर, चरण धुर्वे, योगेश बनाईत, प्रकाश मांगे, इमरान शेख, राम बनके, नरेंद्र घाटोडे, किशोर सातपुते, प्रहलाद गोहिते, कोमल भालेराव, मयूर फोले, प्रदीप चौरे, आदित्य फोले, सुभाष धारपुरे, गुणवत मेश्राम, आकाश उइके, मोरेश्वर सितकारे, प्रवीण ठाकरे, अतुल कोघे, भादुलाल कुमरे, विशाल उइके, राजेश सोमकुवर, निलेश पाटनकर सहित बड़ी संख्या में युवा एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।