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राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी, एमपी और राजस्थान सरकारों को फटकार

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THE NewsBar | नई दिल्ली। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में लगातार बढ़ रहे अवैध रेत खनन और माफियाओं के हौसलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने इस मामले पर सख्त नाराजगी जताते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को तत्काल प्रभाव से ठोस और समन्वित कदम उठाने के कड़े निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्रों की तबाही को मूक दर्शक बनकर नहीं देखा जा सकता। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए तीनों राज्यों को अपनी निगरानी व्यवस्था को युद्ध स्तर पर मजबूत करना होगा।

अदालत ने सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में बिना रजिस्ट्रेशन और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों से सरेआम हो रही अवैध रेत ढुलाई की मीडिया रिपोर्टों का विशेष संज्ञान लिया। इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा कि यदि ये खबरें सही हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने अदालत में गलत हलफनामा दाखिल कर गुमराह करने की कोशिश की है। सर्वोच्च अदालत ने इस ढुलमुल रवैये को आड़े हाथों लेते हुए तीनों राज्यों को निर्देश दिया है कि अवैध खनन में शामिल फर्जी नंबरों या बिना नंबर प्लेट वाले सभी वाहनों को तुरंत जब्त कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी व आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए।

निगरानी व्यवस्था को आधुनिक और फुलप्रूफ बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्य सरकारों को प्रभावित इलाकों में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने, विशेष कंट्रोल सेंटर स्थापित करने और मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का आदेश दिया है। इस पूरी व्यवस्था को आगामी छह महीने के भीतर हर हाल में चालू करने की समय-सीमा तय की गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों को चेताया कि उनकी कार्रवाई सिर्फ वाहन चालकों (ड्राइवरों) को पकड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अवैध खनन के इस पूरे नेटवर्क को चलाने वाले असली चेहरों—वाहन मालिकों और मुख्य ठेकेदारों के खिलाफ भी सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फील्ड स्तर पर तैनात वन विभाग के कर्मचारियों पर रेत माफियाओं द्वारा किए जा रहे जानलेवा हमलों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा और प्रभावी कार्रवाई के लिए फील्ड लेवल पर खाली पड़े वन रक्षकों (फॉरेस्ट गार्ड) के पदों पर तत्काल और तेजी से नियुक्तियां की जाएं। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कोर्ट ने स्थानीय स्तर पर लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का भी सुझाव दिया। राज्यों को कहा गया कि वे इन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के लिए विशेष रोजगार योजनाएं, स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और इको-टूरिज्म जैसी संभावनाएं तलाशें ताकि वे संरक्षण और वृक्षारोपण के कार्यों से जुड़ सकें।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य लगभग 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला एक अत्यंत संवेदनशील संरक्षित क्षेत्र है, जो दुर्लभ घड़ियालों, गंगा डॉल्फिनों और रेड क्राउन रूफ टर्टल जैसे लुप्तप्राय जीवों का प्राकृतिक आवास है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध रेत खनन इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। अब इस बेहद संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की गई है।

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