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सिर्फ 5 घंटे में जम्मू से श्रीनगर! वंदे भारत से सफर हुआ आसान, ₹855 किराया, CORAS कमांडो की सुरक्षा और यूरोप जैसा नजारा

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THE NewsBar | श्रीनगर/जम्मू। एक समय था जब कश्मीर घाटी से देश के बाकी हिस्सों तक पहुंचना मौसम के रहमोकरम पर निर्भर करता था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। जम्मू और श्रीनगर के बीच बहुप्रतीक्षित वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) के शुरू होने से कश्मीर का सफर न सिर्फ आसान हुआ है, बल्कि किसी यूरोपीय देश की यात्रा जैसा रोमांचक भी बन गया है।

अब यात्री महज 5 घंटे में जम्मू से श्रीनगर की दूरी तय कर सकते हैं, और वह भी मात्र 855 रुपए के किफायती किराए में। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस रूट पर विशेष ‘कोरास’ (CORAS) कमांडो तैनात किए गए हैं।

जब हाईवे बंद होने से बढ़ जाती थीं मुश्किलें

इस बदलाव की अहमियत को समझने के लिए पुलवामा के रहने वाले जावेद अहमद की 2023 की कहानी जानना जरूरी है। जावेद के ससुर की चंडीगढ़ में एक अहम सर्जरी होनी थी। कश्मीर से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) था, जो लैंडस्लाइड या बर्फबारी के कारण अक्सर बंद रहता है।

एहतियात के तौर पर जावेद कुछ दिन पहले ही निकल गए, लेकिन 50 किमी दूर काजीगुंड पहुंचते ही पता चला कि रामबन के पास हाईवे बंद है। सर्जरी की तारीख करीब आ रही थी और हाईवे खुलने का नाम नहीं ले रहा था। अंततः उन्हें मजबूरन फ्लाइट की टिकट करानी पड़ी। परिवार के चार-पांच लोगों के हवाई सफर का खर्च लगभग सर्जरी के खर्च के बराबर बैठ गया।

यह कहानी सिर्फ जावेद की नहीं, बल्कि घाटी के हर उस नागरिक की थी, जो सर्दियों के मौसम में मेडिकल इमरजेंसी या किसी जरूरी काम से बाहर जाना चाहता था।

USBRL प्रोजेक्ट ने बदली घाटी की तकदीर

30 अप्रैल से पहले तक जो परेशानियां कश्मीर के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थीं, वे अब बीते दिनों की बात हो गई हैं। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना ने घाटी के परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत शुरू हुई वंदे भारत एक्सप्रेस ने न केवल दूरियों को समेटा है, बल्कि व्यापार और पर्यटन के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं।

जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस की प्रमुख खासियतें:

  • किफायती सफर: जम्मू से श्रीनगर तक का किराया मात्र 855 रुपए तय किया गया है, जो हवाई सफर और प्राइवेट टैक्सी के मुकाबले बेहद सस्ता है।

  • समय की बचत: जहां सड़क मार्ग से इस सफर में 10-12 घंटे या उससे अधिक का समय लगता था, वहीं अब यह दूरी महज 5 घंटे में तय हो जाती है।

  • कड़ी सुरक्षा: दुर्गम और संवेदनशील रास्तों को ध्यान में रखते हुए ट्रेन और पटरियों की सुरक्षा के लिए रेलवे के विशेष CORAS (Commando for Railway Security) कमांडो तैनात किए गए हैं।

  • यूरोप सा नजारा: पीर पंजाल की बर्फीली वादियों, ऊंचे पुलों और लंबी सुरंगों से गुजरते हुए यह ट्रेन यात्रियों को स्विट्जरलैंड और यूरोप के किसी भी हिल स्टेशन जैसा विहंगम दृश्य दिखाती है।

अब कश्मीर घाटी रेल नेटवर्क के जरिए सीधे देश के बाकी हिस्सों से जुड़ गई है। यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि कश्मीर की विकास यात्रा में एक मील का पत्थर है, जिसने अनिश्चितता के बादलों को हटाकर सहूलियत की नई सुबह दी है।

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