गृह विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश – अपराधियों पर कड़ा प्रहार, कानून व्यवस्था पर कोई समझौता नहीं
THE NewsBar | भोपाल। मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को और अधिक सख्त तथा प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़े संकेत दिए हैं। गृह विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क करने जैसी कार्रवाई भी प्रभावी ढंग से की जाए। मुख्यमंत्री के तेवरों को देखते हुए राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मॉडल अपनाया जाएगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत बनाए रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर आरक्षक स्तर तक सभी को सजग और सक्रिय रहना होगा। अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराधों पर अंकुश और आधुनिक पुलिसिंग को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
महिला सुरक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास छेड़छाड़ और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जाए। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के प्रति पुलिस पूरी गंभीरता से कार्य करे तथा किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साइबर अपराध से निपटने के लिए विशेषज्ञों की मदद
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को गंभीर चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को आईटी विशेषज्ञों और साइबर कंसल्टेंट्स की सेवाएं प्राथमिकता से लेने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य साइबर सेल को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दुरुपयोग, सोशल मीडिया आधारित अपराधों और ऑनलाइन ठगी के मामलों के प्रभावी विश्लेषण के लिए विशेषज्ञ संसाधन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
विवेचना अधिकारियों को मिल सकता है विशेष भत्ता
मुख्यमंत्री ने बताया कि अपराधों की जांच में जुटे विवेचना अधिकारियों को कई प्रकार के खर्चों का सामना करना पड़ता है। अपराध स्थल पर पहुंचना, साक्ष्य जुटाना, फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य संग्रह, गवाहों और पीड़ितों की व्यवस्था जैसी जिम्मेदारियों को देखते हुए मध्यप्रदेश में भी अन्वेषण भत्ता (Investigation Allowance) लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों पर भी फोकस
बैठक में सिंहस्थ-2028 को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भीड़ प्रबंधन, कानून व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाएं केवल अस्थायी न हों, बल्कि स्थायी अधोसंरचना के रूप में विकसित की जाएं ताकि भविष्य में भी उनका लाभ मिल सके।
पुलिस के नवाचारों की सराहना
मुख्यमंत्री ने राज्य को नक्सल मुक्त बनाने, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, आपदा मित्रों को प्रशिक्षित करने, एयर एम्बुलेंस संचालन में सहयोग, अग्निशमन सेवाओं को सुदृढ़ करने और सैनिक कल्याण संबंधी प्रयासों की सराहना की। उन्होंने खुले स्थानों पर मांस विक्रय पर प्रतिबंध और तेज ध्वनि में लाउडस्पीकर के उपयोग को नियंत्रित करने संबंधी निर्देशों के पालन को भी महत्वपूर्ण बताया।
एआई आधारित ‘सेफगार्ड एमपी’ की तैयारी
बैठक में एआई तकनीक के माध्यम से बुजुर्गों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘सेफगार्ड एमपी’ जैसी अभिनव व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा काउंटर टेररिस्ट ग्रुप को मजबूत करने, एटीएस, एसटीएफ और हॉक फोर्स जैसी विशेष इकाइयों की क्षमता बढ़ाने तथा जिला स्तर पर सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट्स के संचालन पर भी विचार किया गया।
बड़ा सवाल: क्या अपराधियों पर सख्त होगा सरकार का शिकंजा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की समीक्षा बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की नरमी के पक्ष में नहीं है। अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने, साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने और पुलिस व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या मध्यप्रदेश में भी अपराध के खिलाफ वैसी ही सख्त नीति देखने को मिलेगी जैसी उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय रही है। आने वाले समय में सरकार की कार्रवाई इस सवाल का जवाब देगी।