THE NewsBar | शुभम नांदेकर, जुन्नारदेव (छिंदवाड़ा)। छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव क्षेत्र के ग्राम मोयारी में महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ ऐसा साहसिक कदम उठाया, जिसने आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अवैध शराब की तस्करी को रोकने में जिम्मेदार विभाग लगातार विफल नजर आ रहे थे, उसे गांव की महिलाओं ने अपनी एकजुटता और हिम्मत के दम पर बेनकाब कर दिया।
महिलाओं ने रोकी शराब से भरी बोलेरो
जानकारी के अनुसार, गांव में अवैध शराब की खेप लेकर पहुंच रही एक बोलेरो वाहन को महिलाओं ने घेर लिया। महिलाओं ने वाहन को रोककर उसमें शराब होने की आशंका जताई और पूरे मामले की जानकारी ग्रामीणों एवं संबंधित अधिकारियों को दी। महिलाओं की इस कार्रवाई से शराब तस्करों में हड़कंप मच गया।
आबकारी विभाग और ठेकेदारों की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन आबकारी विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में आबकारी विभाग और शराब ठेकेदारों की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
‘नशा मुक्ति अभियान’ पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं। उनका सवाल है कि जब गांव की महिलाएं बिना किसी सरकारी संसाधन के अवैध शराब की खेप पकड़ सकती हैं, तो पुलिस और आबकारी विभाग ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
महिलाओं की पहल बनी मिसाल
मोयारी गांव की महिलाओं के इस साहसिक कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि हर गांव के लोग इसी तरह जागरूक होकर आगे आएं, तो अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
अब लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध शराब के नेटवर्क का खुलासा करे, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करे तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे। महिलाओं का यह साहस समाज के लिए प्रेरणा बनकर सामने आया है।