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उत्तराखंड: पीएम मोदी ने किया दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, अब 2.5 घंटे में पूरा होगा सफर

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देहरादून। उत्तराखंड के विकास और कनेक्टिविटी के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) का विधिवत उद्घाटन किया। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से अब दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी महज 2.5 घंटे में तय की जा सकेगी, जिसमें पहले 6 घंटे का समय लगता था। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को राज्य की समृद्धि के नए युग का आरंभ माना जा रहा है।

एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर और आधुनिक तकनीक: इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसका 12 किलोमीटर लंबा ‘वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर’ है, जो एशिया में अपनी तरह का सबसे लंबा कॉरिडोर है। प्रधानमंत्री ने उद्घाटन से पहले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से इस खंड का निरीक्षण किया। पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए इसमें 2 हाथी अंडरपास और 6 एनिमल पास बनाए गए हैं, ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव न हो। एक्सप्रेसवे के निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर 33,000 से अधिक पेड़ों को कटने से बचाया गया है और प्रतिपूरक वृक्षारोपण के तहत करीब 2 लाख पेड़ लगाए गए हैं।

डाट काली में पूजा और 12 किलोमीटर का भव्य रोड शो: लोकार्पण कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध सिद्धपीठ डाट काली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने आशारोड़ी चेक पोस्ट से शहीद जसवंत सिंह मैदान तक 12 किलोमीटर लंबा भव्य रोड शो किया। देहरादून की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा और 500 से अधिक सांस्कृतिक कर्मियों ने छोलिया और हरुल नृत्य के साथ पीएम का स्वागत किया। 44 वेदपाठियों ने शंख ध्वनि और मंत्रोच्चार के साथ देवभूमि में उनका अभिनंदन किया।

जून तक हरिद्वार मार्ग भी होगा तैयार – नितिन गडकरी: मंच पर मौजूद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक और बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि जून 2026 तक सहारनपुर से हरिद्वार का मार्ग भी तैयार हो जाएगा, जिसे इसी एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रोजेक्ट को देवभूमि के लिए पीएम मोदी की बड़ी सौगात बताया। वहीं, पूर्व सीएम हरीश रावत ने बाबा साहब की जयंती के उपलक्ष्य में इस एक्सप्रेसवे का नाम “बाबा साहब भीमराव अंबेडकर” के नाम पर रखने की मांग की है। इस एक्सप्रेसवे से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ईंधन की 19 प्रतिशत बचत के साथ उत्तराखंड की आर्थिकी को भी नई मजबूती मिलेगी।

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