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मप्र में अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में बड़ा बदलाव: CPCT की अनिवार्यता खत्म होगी, माता-पिता को छोड़ने पर जाएगी नौकरी

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सरकार लाई सख्त व्यवस्था, आश्रितों के भरण-पोषण को बनाया अनिवार्य; लापता कर्मचारी मिलने पर बहाल होगी सेवा”

THE NewsBar | शुभम नांदेकर, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के नियमों में बड़े बदलाव करने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने प्रस्तावित संशोधनों पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त कर ली है और जल्द ही इन्हें मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। नए प्रावधानों का उद्देश्य मृत या लापता शासकीय कर्मचारियों के आश्रितों को राहत देना और पारिवारिक जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करना है।

CPCT परीक्षा की अनिवार्यता खत्म करने की तैयारी

प्रस्तावित नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले आश्रितों के लिए वर्तमान में लागू कंप्यूटर प्रवीणता एवं प्रमाणन परीक्षा (CPCT) की अनिवार्यता समाप्त की जा सकती है। लंबे समय से कर्मचारी संगठनों और प्रभावित परिवारों की ओर से यह मांग उठाई जा रही थी कि नौकरी पाने के बाद भी कई उम्मीदवार CPCT की शर्त पूरी नहीं कर पाने के कारण परेशानी झेलते हैं। सरकार अब इस बाध्यता को हटाकर प्रक्रिया को सरल बनाने पर विचार कर रही है।

बिना ठोस कारण नहीं छीनी जा सकेगी नौकरी

नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर्मचारी को विभाग मनमाने तरीके से सेवा से पृथक नहीं कर सकेगा। यदि किसी प्रकार की कार्रवाई की जाती है तो उसके लिए ठोस और प्रमाणित कारण आवश्यक होंगे। इससे नियुक्ति पाने वाले आश्रितों को अधिक सुरक्षा मिलेगी।

माता-पिता और आश्रितों की जिम्मेदारी निभाना होगी अनिवार्य

सरकार ने पारिवारिक उत्तरदायित्व को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्रस्ताव के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले बेटे, बेटी या अन्य आश्रित को परिवार के अन्य आश्रित सदस्यों का नियमित भरण-पोषण करना होगा। यदि शिकायत मिलती है कि नौकरी मिलने के बाद उसने माता-पिता या अन्य आश्रितों को छोड़ दिया है अथवा उनकी देखभाल नहीं कर रहा है, तो जांच के बाद उसकी अनुकंपा नियुक्ति समाप्त की जा सकेगी।

लापता कर्मचारी के मामले में भी नया प्रावधान

नियमों में लापता शासकीय कर्मचारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक लापता रहता है और उसके आश्रित को नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति दे दी जाती है, लेकिन सात वर्ष बाद कर्मचारी जीवित मिल जाता है, तो उसे पुनः शासकीय सेवा में बहाल किया जा सकेगा। ऐसी स्थिति में आश्रित को दी गई अनुकंपा नियुक्ति स्वतः निरस्त हो जाएगी।

पहले भी हुए हैं अनुकंपा नियमों में बदलाव

मध्यप्रदेश सरकार समय-समय पर अनुकंपा नियुक्ति नीति में संशोधन करती रही है। इससे पहले राज्य सरकार ने विवाहित बेटियों को भी अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार प्रदान किया था, जिससे पात्रता का दायरा बढ़ा था।

कर्मचारियों और आश्रित परिवारों को मिलेगी राहत

सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य मृत या लापता कर्मचारियों के परिवारों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराना, नियुक्ति प्रक्रिया को सरल बनाना तथा परिवार के कमजोर सदस्यों के हितों की रक्षा करना है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नए नियम पूरे प्रदेश में लागू किए जाएंगे।

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