इस्लामाबाद/वॉशिंगटन। खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल गहरा गए हैं. पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है. ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन पर 5 साल की रोक लगाने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए, ट्रंप प्रशासन ने 20 साल की शर्त रखी थी. समझौते पर सहमति न बनने के तुरंत बाद अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी बंदरगाहों की सैन्य नाकाबंदी शुरू कर दी है.
प्रमुख घटनाक्रम: एक नज़र में
सैन्य नाकाबंदी: अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नाकाबंदी का उल्लंघन करने वाले किसी भी ईरानी जहाज को “तुरंत और सख्ती से” तबाह कर दिया जाएगा।
ईरान की जवाबी चेतावनी: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।
भारत के लिए राहत: तनाव के बीच ईरान ने एक कूटनीतिक सकारात्मक संकेत दिया है. ईरान ने कहा है कि वह भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने में मदद करेगा।
तेल बाजार में आग: वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा ले जाने वाले इस मार्ग पर तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 50% तक उछलकर $102 प्रति बैरल तक जा पहुंची हैं।
वैश्विक प्रतिक्रिया और कूटनीति
अमेरिका को इस नाकाबंदी पर अपने पारंपरिक सहयोगियों, विशेषकर यूरोपीय देशों का समर्थन नहीं मिला है. कई देशों ने इस सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया है. वहीं, वैटिकन के पोप लियो ने ट्रंप के साथ राजनीतिक बहस में पड़ने से इनकार करते हुए विश्व शांति की अपील की है।
पाकिस्तान अभी भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसे उम्मीद है कि जल्द ही ‘सीजफायर’ वार्ता का अगला दौर शुरू हो सकता हैम