नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 में देश के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिले चंदे के आंकड़े सामने आ गए हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सबसे अधिक चंदा पाने वाली पार्टी बनकर उभरी है। वहीं कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही।
आंकड़ों के अनुसार, सभी राष्ट्रीय दलों को कुल 11,343 दानकर्ताओं से 6648.563 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ। इसमें अकेले भाजपा को 6074.015 करोड़ रुपये मिले, जो कुल चंदे का 91% से अधिक है। भाजपा को यह राशि 5522 दानदाताओं से प्राप्त हुई, जो अन्य दलों के मुकाबले कई गुना अधिक है।
वहीं कांग्रेस को 2501 दानकर्ताओं से 517.394 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो भाजपा के मुकाबले करीब 12 गुना कम है। आम आदमी पार्टी को 38.106 करोड़ रुपये, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 16.957 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ।
इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा नेशनल पीपुल्स पार्टी का रहा, जिसके चंदे में 1313% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। पार्टी को इस वर्ष 2.091 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि पिछले वर्ष यह राशि बेहद कम थी।
वहीं बहुजन समाज पार्टी ने पिछले वर्षों की तरह इस बार भी 20 हजार रुपये से अधिक के किसी भी चंदे को प्राप्त न होने की जानकारी दी है।
राज्यवार आंकड़ों में दिल्ली सबसे आगे रही, जहां से 2639.48 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसके बाद महाराष्ट्र (2438.86 करोड़ रुपये) और गुजरात (309.17 करोड़ रुपये) का स्थान रहा।
चंदे के स्रोत की बात करें तो इस बार भी कॉरपोरेट दान का दबदबा रहा। कुल चंदे का 92.18% हिस्सा कॉरपोरेट सेक्टर से आया। 3,244 कॉरपोरेट दानदाताओं ने 6128.787 करोड़ रुपये दिए, जबकि 7,900 व्यक्तिगत दानदाताओं ने 505.66 करोड़ रुपये का योगदान दिया।
सबसे बड़े दानकर्ताओं में प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट, प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट और एबी जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट शामिल रहे। इनके अलावा सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कुल मिलाकर, 2024-25 में राजनीतिक दलों के चंदे में 161% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय राजनीति में बढ़ते कॉरपोरेट प्रभाव और चुनावी वित्तपोषण के बदलते स्वरूप को दर्शाता है।