THE NewsBar | मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने की अटकलें तेज हो गई हैं। दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद पार्टी से अलग होकर उपमुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो 19 जून को होने वाले शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से ठीक पहले यह के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
दिल्ली तक पहुंची हलचल, अलग गुट बनाने की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है और अन्य सांसदों के भी राजधानी पहुंचने की खबरें हैं। चर्चाएं हैं कि पहले सांसदों का एक अलग समूह बनाया जा सकता है, जिसके बाद वह शिंदे गुट की शिवसेना में विलय का रास्ता चुन सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी भी सांसद की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
दलबदल कानून से बचने की रणनीति?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सांसदों का संभावित कदम दलबदल विरोधी कानून को ध्यान में रखकर उठाया जा सकता है। लोकसभा में किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होते हैं तो अयोग्यता से बचने का रास्ता खुल सकता है। इसी वजह से 9 में से 6 सांसदों के एक साथ कदम उठाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
संकट टालने के लिए सक्रिय हुआ ठाकरे खेमा
संभावित बगावत की खबरों के बीच उद्धव ठाकरे का खेमा भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि नाराज सांसदों को मनाने और किसी भी संभावित टूट को रोकने के लिए लगातार बैठकों का दौर चल रहा है।
मातोश्री की बैठक ने बढ़ाई अटकलें
हाल ही में उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित मातोश्री में पार्टी के सभी नौ सांसदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन बैठक में केवल चार सांसद ही प्रत्यक्ष रूप से पहुंचे। कुछ सांसदों की गैरमौजूदगी और कुछ के ऑनलाइन जुड़ने से राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।
उद्धव ठाकरे का संकेतों भरा बयान
बैठक के बाद उद्धव ठाकरे का बयान भी काफी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि “जिसे जाना है, वह खुशी से जा सकता है।” साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि राजनीति में परिस्थितियां बदलती रहती हैं और जो लोग पार्टी छोड़कर जाते हैं, उन्हें बाद में अपने फैसले पर पछतावा भी हो सकता है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं ने बढ़ाया सस्पेंस
पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा भी जोरों पर है। दावा किया जा रहा था कि इसके तहत कुछ सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं। हालांकि एकनाथ शिंदे ने ऐसी सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव खत्म हो चुके हैं और अब किसी भी तरह के नंबर गेम की आवश्यकता नहीं है।
चार साल में दूसरी बड़ी चुनौती
यदि सांसदों की बगावत की चर्चाएं सच साबित होती हैं तो यह शिवसेना (UBT) के लिए पिछले चार वर्षों में दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका होगा। जून 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद बड़ी संख्या में विधायक उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ चुके थे, जिसके बाद पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी शिंदे गुट को मिल गया था।
स्थापना दिवस से पहले बढ़ी बेचैनी
19 जून को होने वाले शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में इस संभावित घटनाक्रम ने हलचल मचा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह केवल राजनीतिक अटकलें हैं या फिर शिवसेना (UBT) वास्तव में एक और बड़ी टूट का सामना करने जा रही है। आने वाले कुछ दिन महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं।