THE NewsBar | शुभम नांदेकर, छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश में तबादलों को लेकर सियासत गरमा गई है। एक ओर छिंदवाड़ा जिले में अपेक्षा के अनुरूप तबादला सूची जारी नहीं होने से भाजपा संगठन के भीतर नाराजगी सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने पूरी तबादला प्रक्रिया को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सूत्रों के अनुसार छिंदवाड़ा प्रदेश का ऐसा जिला बनकर उभरा है, जहां ट्रांसफर सीजन के दौरान बड़ी संख्या में तबादले नहीं हो सके। जिला स्तर पर सीमित संख्या में ही कर्मचारियों के स्थानांतरण हो पाए, जिससे संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में असंतोष दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि इसी नाराजगी के चलते भाजपा के 23 मंडल अध्यक्षों ने बैतूल पहुंचकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात की और उनके द्वारा सुझाए गए नामों पर कार्रवाई नहीं होने की शिकायत की। प्रदेश अध्यक्ष ने मामले में उचित पहल का आश्वासन दिया है।
कैसे पिछड़ गया छिंदवाड़ा?
जानकारी के मुताबिक राज्य स्तर पर कई अधिकारियों के तबादले हुए, लेकिन जिला स्तर की सूची समय पर तैयार नहीं हो सकी। भाजपा की संगठनात्मक व्यवस्था के तहत विधानसभा कोर कमेटियों के माध्यम से मंडल अध्यक्षों से नाम मांगे गए थे। ये नाम जिला स्तर तक तो पहुंचे, लेकिन सूची को अंतिम रूप देने में देरी हो गई। बताया जाता है कि प्रस्तावित सूची 16 जून को प्रभारी मंत्री तक पहुंची, जिसके बाद अंतिम समय में सीमित संख्या में ही तबादले किए जा सके और बड़ी संख्या में प्रस्ताव लंबित रह गए।
खेमेबाजी भी बनी वजह
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिले में भाजपा के भीतर चल रही खेमेबाजी ने भी स्थिति को जटिल बनाया। पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं बढ़ी हुई थीं, लेकिन विभिन्न गुटों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई नाम अंतिम सूची तक नहीं पहुंच सके। नाराज कार्यकर्ताओं का सवाल है कि यदि सूची जारी नहीं करनी थी तो नाम मांगने की आवश्यकता ही क्या थी।
कांग्रेस का हमला: ‘ट्रांसफर बन गया कारोबार’
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने तबादलों को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा-
“तबादलों का खेल रचाया है सरकार ने,
हर कुर्सी का भाव लगाया है बाजार ने।
दलाल लाइन में हैं, बिचौलिए मालामाल हैं,
ट्रांसफर प्रदेश का सबसे बड़ा कारोबार बन गया है।”
पटवारी ने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश की “ट्रांसफर फैक्ट्री” का संचालन वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल से हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तबादलों की पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता से दूर होकर राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों के घेरे में आ गई है।
ट्रांसफर पर बढ़ी सियासी तपिश
छिंदवाड़ा में भाजपा संगठन की नाराजगी और कांग्रेस के हमलों ने तबादलों के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदेश नेतृत्व की ओर से लंबित तबादला प्रस्तावों पर कोई नई पहल होती है या नहीं, और सरकार विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब देती है।