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मालवांचल में पवार-भोयर-परमार महासभा का सफल संपर्क अभियान, सामाजिक एकजुटता पर हुआ मंथन

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THE NewsBar | छिंदवाड़ा। पवार-भोयर-परमार महासभा मध्यप्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष प्रशांत पराड़कर के नेतृत्व में मालवांचल क्षेत्र में व्यापक संपर्क अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अभियान के दौरान सीहोर, सुजालपुर, नेमावर, कालापीपल, इछावर, आष्टा, रन्नौदगंज, बगडावदा, बोरा, नेमावर धर्मशाला, राजर्षि कॉलेज, राजा भोज शिक्षण समिति सुजालपुर, अलीमाबाद सहित अनेक गांवों, नगर निकायों एवं पंचायत क्षेत्रों का सघन दौरा किया गया।

इस दौरान विभिन्न स्थानों पर महासभा पदाधिकारियों का पगड़ी पहनाकर एवं पुष्पमालाओं से भव्य स्वागत किया गया। समाज के विभिन्न संगठनों ने महासभा से जुड़कर सामाजिक विसंगतियों को दूर करने तथा समाज को संगठित करने का संकल्प लिया।

संपर्क यात्रा में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विष्णु परमार, देवराज भाई परमार, जितेंद्र परमार एवं सतीश परमार सहित अनेक पदाधिकारी शामिल रहे। यात्रा के समापन पर धार स्थित भोजशाला परिसर में समाज की आराध्य मां वाग्देवी का वैदिक पूजन प्रांतीय अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा संपन्न कराया गया।

भोजशाला आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ समाजसेवी एवं कानूनी लड़ाई के प्रमुख चेहरा गोपाल भाई शर्मा तथा उनके साथियों से भी महासभा प्रतिनिधिमंडल की विशेष चर्चा हुई। इस अवसर पर गोपाल भाई शर्मा ने कहा कि राजा भोज हिंदू समाज के गौरव पुरुष हैं और भोजवंशी समाज उनकी गौरवशाली परंपरा का उत्तराधिकारी है। न्यायालय के निर्णय से सत्य की विजय हुई है।

संपर्क अभियान में सौंसर, पांढुर्णा, बैतूल, छिंदवाड़ा एवं जबलपुर से आए समाजजनों की सक्रिय सहभागिता रही। पूरे दौरे के दौरान सामाजिक एकजुटता, संगठन विस्तार एवं समाज के भविष्य को लेकर गहन चिंतन-मंथन किया गया।

प्रांतीय अध्यक्ष प्रशांत पराड़कर ने कहा कि धार स्थित भोजशाला समाज की आस्था और गौरव का केंद्र है। यहां विराजमान मां वाग्देवी के दर्शन के लिए समाजजनों को अवश्य पहुंचना चाहिए। उन्होंने बताया कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सुलभ हैं।

इस अवसर पर उपस्थित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पूर्व सांसद कंकर मुंजारे द्वारा राजा भोज को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि समाज और राजनीति के प्रत्येक व्यक्ति को इतिहास पुरुषों एवं महापुरुषों का सम्मान करना चाहिए। महापुरुष किसी एक समाज, क्षेत्र या धर्म के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की साझा धरोहर होते हैं।

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