THE NewsBar | मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि नियुक्ति अनुबंध में तबादले का कोई प्रावधान नहीं है, तो सेवा अवधि के दौरान कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।
MP Samvida Employees New Rule: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि नियुक्ति अनुबंध में तबादले का कोई प्रावधान नहीं है, तो सेवा अवधि के दौरान कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।
जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने मुकेश कुमार उपाध्याय सहित अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए संविदाकर्मियों के ट्रांसफर ऑर्डर को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
संविदा कर्मी का ट्रांसफर पूरी तरह से गैर कानूनी
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें 24 फरवरी 2020 के सर्कुलर का हवाला देकर ट्रांसफर को सही ठहराने की कोशिश की गई थी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविदा नियुक्ति की प्रकृति स्थायी सरकारी सेवा से अलग होती है और इसमें अनुबंध की शर्तों का ही विशेष महत्व होता है। किसी असाधारण परिस्थिति में भी बीच अवधि में किया गया ट्रांसफर पूरी तरह से अनुबंध की मूल भावना के विपरीत और गैर-कानूनी है।
नए अनुबंध में ट्रांसफर की शर्त जोड़ सकती है सरकार
इस फैसले में कोर्ट ने राज्य सरकार को भविष्य के लिए एक बड़ी वैधानिक छूट भी प्रदान की है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि वर्तमान अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद सरकार या शासन पूरी तरह स्वतंत्र होगा। यदि सरकार आगामी समय में नए सिरे से या नवीनीकृत (रिन्यू) किए जाने वाले अनुबंधों में तबादला संबंधी अनिवार्य शर्त को जोड़ना चाहती है, तो वह ऐसा कर सकती है।