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27 मई को ही ट्रस्ट और पुलिस को मिली थी चढ़ावा चोरी की जानकारी, एफआईआर में देरी पर उठे सवाल

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THE NewsBar | अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कथित चोरी की जानकारी 27 मई को ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्थानीय पुलिस के संज्ञान में आ गई थी।

बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय स्वयं प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने थाने पहुंचे थे, लेकिन कथित तौर पर एक फोन कॉल आने के बाद वे बिना शिकायत दर्ज कराए वापस लौट गए। इसी बिंदु को लेकर अब जांच एजेंसियां और विपक्ष कई सवाल उठा रहे हैं।

पुलिस पूछताछ में चंपत राय ने स्वीकार किया कि शिकायत दर्ज कराने में देरी हुई और इसे उन्होंने अपनी “गलती” बताया। हालांकि, कई महत्वपूर्ण सवालों पर वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। विशेष जांच दल (SIT) अब यह पता लगाने में जुटा है कि एफआईआर तत्काल दर्ज क्यों नहीं कराई गई और इस दौरान क्या-क्या घटनाक्रम हुए।

इस पूरे मामले में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। जांच में मंदिर के चढ़ावे और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जा रही है।

विवाद बढ़ने के बीच चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट ने कहा है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है तथा करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई सोने-चांदी की वस्तुएं और अन्य मूल्यवान सामग्री सुरक्षित हैं। इस्तीफों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की आगामी बैठक में लिया जाएगा।

इस मामले ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं- यदि 27 मई को ही चोरी की जानकारी मिल गई थी, तो एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों हुई? कथित फोन कॉल किसका था और उसके बाद शिकायत दर्ज कराने का निर्णय क्यों बदला गया? इन सभी पहलुओं की जांच SIT कर रही है और आने वाले दिनों में मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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