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जहां हर मिनट उफनता था 25 हजार लीटर पानी, वहां बना इंजीनियरिंग का चमत्कार; सीएम डॉ. मोहन यादव ने देखा स्लीमनाबाद टनल का ड्रीम प्रोजेक्ट

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THE NewsBar | कटनी/भोपाल। मध्यप्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद टनल अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले में पहुंचकर इस ऐतिहासिक परियोजना का निरीक्षण किया। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह टनल नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण के सहारे सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी और विंध्य-महाकौशल के हजारों किसानों की तस्वीर बदल देगी।

मुख्यमंत्री ने इसे “विज्ञान और इंजीनियरिंग का चमत्कार” बताते हुए कहा कि यह परियोजना आने वाले सौ वर्षों तक सुरक्षित रहेगी और भीषण भूकंप का भी इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। टनल बनने से कटनी, मैहर, सतना, रीवा, पन्ना और जबलपुर के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।

2016 के बाद बदली रफ्तार, कठिन संघर्ष के बाद मिली सफलतामुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2015 तक टनल की खुदाई बेहद धीमी थी। इसके बाद 2016 में जर्मनी से मंगाई गई अत्याधुनिक मशीन से खुदाई का काम तेज हुआ। इंजीनियरों, तकनीशियनों और मजदूरों ने लगातार कठिन परिस्थितियों में काम किया। वर्ष 2023 में ठेकेदार के पीछे हटने और मशीनों के पुराने पड़ जाने जैसी चुनौतियों के बावजूद सरकार ने परियोजना को रुकने नहीं दिया और अब यह लगभग पूरी हो चुकी है।

जहां हर मिनट फूटता था 25 हजार लीटर पानी

स्लीमनाबाद टनल का निर्माण आसान नहीं था। विंध्य पर्वतमाला के भीतर मार्बल, लाइमस्टोन और डोलोमाइट जैसी कठोर चट्टानों के बीच खुदाई करनी पड़ी। कई स्थानों पर विशाल भूमिगत गुफाएं मिलीं और टनल के भीतर प्रति मिनट लगभग 25 हजार लीटर पानी का तेज रिसाव होता था।

काम के दौरान अमेरिकी टनल बोरिंग मशीन भी क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष ग्राउटिंग तकनीक का उपयोग किया गया। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के नीचे से गुजरने के बावजूद कहीं भी कोई नुकसान नहीं हुआ।

120 फीट नीचे बनी टनल, 100 साल तक रहेगी सुरक्षित

करीब 11.952 किलोमीटर लंबी और 10.14 मीटर व्यास वाली यह टनल कई स्थानों पर जमीन से 120 फीट नीचे बनाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि अगले 100 वर्षों तक इसकी संरचना सुरक्षित बनी रहेगी और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का भी इस पर असर नहीं पड़ेगा।

नर्मदा का पानी पहुंचेगा सोन नदी बेसिन तक

यह परियोजना नर्मदा नदी के पानी को पहली बार गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी। इससे विंध्य और बघेलखंड के जल संकट वाले क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान होगा। भविष्य में इस परियोजना से बिजली उत्पादन की भी संभावना है।

किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी तीन महीनों में रबी सीजन के लिए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपनी जमीन नहीं बेचने की अपील करते हुए कहा कि यह इलाका आने वाले समय में कृषि उत्पादन के मामले में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ सकता है। इससे पलायन रुकेगा और क्षेत्र आर्थिक रूप से समृद्ध होगा।

1600 करोड़ से अधिक की लागत, 96% काम पूरा

इस परियोजना का अनुबंध वर्ष 2008 में हैदराबाद की निर्माण एजेंसी पटेल-एसईडब्ल्यू (संयुक्त उपक्रम) को दिया गया था। शुरुआत में इसकी लागत 799 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन कठिन भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक के उपयोग के कारण लागत बढ़कर 1610.47 करोड़ रुपये हो गई।

वर्तमान में परियोजना का 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। मुख्य 11.952 किलोमीटर लंबी टनल और 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है।

1450 गांवों की बदलेगी तस्वीर

परियोजना पूरी होने के बाद लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके तहत कटनी, मैहर, सतना, रीवा, पन्ना और जबलपुर जिले सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। साथ ही जल संसाधन विभाग की अन्य परियोजनाओं के लिए भी इस टनल से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार का लक्ष्यराज्य सरकार के रोडमैप के अनुसार वर्ष 2026 के अंत तक 87,433 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को परियोजना से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके साथ ही लगभग 30 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को अन्य सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से भी लाभ मिलेगा।

स्लीमनाबाद टनल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि, जल प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला इंजीनियरिंग का ऐतिहासिक अध्याय बनकर उभर रही है।

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