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सिंगरौली-रतलाम को एयरपोर्ट की दिशा में कदम, तो छिंदवाड़ा कब? हवाई सेवा के साथ पांढुर्णा की रेल सुविधाओं का मुद्दा भी अधूरा

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छिंदवाड़ा हवाई सेवा के साथ पांढुर्णा की रेल सुविधाओं का मुद्दा भी अधूरा-नई घोषणाओं के बीच स्थानीय कनेक्टिविटी पर उठे सवाल

THE NewsBar | शुभम नांदेकर, छिंदवाड़ा/पांढुर्णा। मध्य प्रदेश में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को विस्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। संशोधित ‘उड़ान’ योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच 10 वर्ष के लिए एमओयू होने जा रहा है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार मध्य प्रदेश को 100 करोड़ रुपये की सहायता देगी और प्रदेश में नए एयरपोर्ट विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। सिंगरौली और रतलाम की हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

लेकिन इन घोषणाओं के बीच छिंदवाड़ा और पांढुर्णा की कनेक्टिविटी का सवाल एक बार फिर सामने आ गया है।

छिंदवाड़ा का नाम प्रस्ताव में, लेकिन जमीन पर कब?

खास बात यह है कि अगस्त 2026 में प्रदेश सरकार द्वारा एयरपोर्ट विकसित करने के लिए प्रस्तावित 10 हवाई पट्टियों में छिंदवाड़ा का नाम भी शामिल था। इस सूची में सिंगरौली, सागर, नीमच, छिंदवाड़ा, मंडला, खंडवा, रतलाम, मंदसौर, उमरिया और शहडोल शामिल थे।

इससे यह स्पष्ट है कि छिंदवाड़ा की हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव सरकार के स्तर पर मौजूद है। इससे पहले विधानसभा में भी सरकार की ओर से बताया गया था कि छिंदवाड़ा की मौजूदा हवाई पट्टी का विकास भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा RCS-UDAN 5.2 के तहत प्रस्तावित है और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर होना है।

इसके बावजूद अब जब सिंगरौली और रतलाम को लेकर एमओयू और विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ने की खबर सामने आई है, तो छिंदवाड़ा के लोगों का सवाल स्वाभाविक है- छिंदवाड़ा की हवाई सेवा का नंबर कब आएगा?

पड़ोसी जिलों में हवाई कनेक्टिविटी, छिंदवाड़ा अभी भी प्रतीक्षा में

छिंदवाड़ा एक बड़ा और महत्वपूर्ण जिला है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट भी वर्तमान में बताती है कि छिंदवाड़ा के लिए निकटतम प्रमुख हवाई सुविधा नागपुर है और भोपाल-जबलपुर के माध्यम से भी हवाई संपर्क उपलब्ध है।

ऐसे में स्थानीय स्तर पर लंबे समय से उठती रही हवाई सेवा की मांग को केवल प्रस्ताव तक सीमित रखने के बजाय समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संशोधित उड़ान योजना का उद्देश्य ही छोटे और क्षेत्रीय शहरों को बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध कराना है। केंद्र की नई योजना 2026-27 से 2035-36 तक चलेगी और इसके तहत 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने का प्रावधान है।

पांढुर्णा में रेल सुविधाओं का सवाल भी बरकरार

हवाई कनेक्टिविटी के साथ पांढुर्णा की रेल कनेक्टिविटी भी स्थानीय लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

पांढुर्णा अब अलग जिला है और आधिकारिक जिला वेबसाइट के अनुसार यह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मार्ग पर स्थित है।

रेलवे से जुड़े मुद्दे हाल में मंडल स्तर की बैठक में भी उठे हैं। सितंबर 2026 में छिंदवाड़ा सांसद बंटी विवेक साहू ने पांढुर्णा रेलवे स्टेशन पर कोरोना काल के बाद बंद हुए ट्रेनों के स्टॉपेज पुनः शुरू करने, अतिरिक्त फुटओवर ब्रिज और जन औषधि केंद्र जैसी मांगें रेलवे अधिकारियों के समक्ष रखीं। लेकिन हमेशा की तरह पांढुर्णा में रेल स्टॉपेज की मांग को नजरअंदाज कर दिया गया.!

वहीं, पांढुर्णा में ट्रेनों के स्टॉपेज का मुद्दा इससे पहले मंडल रेल उपयोगकर्ता परामर्श समिति की बैठक में भी उठ चुका है।

हालांकि 2026 में रीवा-चर्लपल्ली एक्सप्रेस के पांढुर्णा में स्टॉपेज की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टॉपेज और यात्री सुविधाओं को लेकर मांगें अभी भी जारी हैं।

विकास की रफ्तार में कनेक्टिविटी भी बने प्राथमिकता

सिंगरौली और रतलाम में एयरपोर्ट विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ना प्रदेश में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में एक कदम है। लेकिन इसी के साथ छिंदवाड़ा की हवाई पट्टी और पांढुर्णा की रेल सुविधाओं पर भी स्पष्ट समयसीमा और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा स्थानीय स्तर पर की जा रही है।

छिंदवाड़ा को एयरपोर्ट के प्रस्ताव में शामिल किए जाने के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इसे वास्तविक एयर कनेक्टिविटी में कब बदला जाता है। वहीं पांढुर्णा के लिए सवाल यह है कि जिन ट्रेनों के स्टॉपेज लंबे समय से मांग का विषय हैं, उन्हें कब बहाल किया जाएगा।

नई घोषणाओं के बीच अब क्षेत्र की मांग सिर्फ प्रस्तावों की नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कनेक्टिविटी की है।

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