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देशभर में अब ‘एक समान’ नियम से बनेंगी दवाएं, CDSCO ने लागू की डोजियर आधारित सख्त लाइसेंस प्रणाली

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नई दिल्ली। भारत में निर्मित दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर उठने वाले सवालों को विराम देने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। अब देश के सभी राज्यों में दवा उत्पादन के लिए एकसमान ‘डोजियर आधारित’ लाइसेंस प्रणाली लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत फार्मा कंपनियों को अब अपनी दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता (Efficacy) से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी एक ही बार में एक विस्तृत डोजियर के रूप में जमा करनी होगी।

लाइसेंस के लिए जमा करना होगा ‘डोजियर’

अब तक अलग-अलग राज्यों में दवा लाइसेंस देने की प्रक्रिया भिन्न थी, जिससे नियमों में ढिलाई और पारदर्शिता की कमी बनी रहती थी। नई प्रणाली के तहत, कंपनियों को दवा की जांच रिपोर्ट, क्लिनिकल डेटा, सुरक्षा मानक और उत्पादन तकनीक से संबंधित सभी दस्तावेजों का पूरा सेट (डोजियर) देना अनिवार्य होगा। स्थानीय औषधि नियंत्रक विभाग इस डोजियर की गहनता से जांच करेगा और सीडीएससीओ के मानकों पर खरा उतरने के बाद ही लाइसेंस देने की सिफारिश की जाएगी। उत्तर प्रदेश एफडीए सहित सभी राज्यों को इस प्रक्रिया को समझने के लिए 9 पन्नों का विस्तृत मार्गदर्शक दस्तावेज भी साझा किया गया है।

घटिया दवाओं और फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

इस सख्त कदम की आवश्यकता पिछले कुछ समय में सामने आई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू घटनाओं के बाद महसूस की गई। पिछले वर्ष तमिलनाडु की एक कंपनी द्वारा नियमों के विरुद्ध लाइसेंस लेकर बनाए गए कफ सिरप से हुई मौतों के मामले ने राज्य स्तरीय लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अलीगढ़ जिला औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस नई व्यवस्था से ‘चयनात्मक’ या ‘मिलीभगत’ वाले लाइसेंस पर रोक लगेगी और दवा कंपनियों की सीधी जवाबदेही तय होगी। इससे न केवल घरेलू बाजार में घटिया दवाओं की एंट्री रुकेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय दवाओं की साख भी बढ़ेगी।

इन उत्पादों को मिली है छूट

हालांकि, यह नई डोजियर आधारित प्रणाली फिलहाल केवल एलोपैथिक दवाओं के उत्पादन पर ही लागू होगी। केंद्र के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) दवाएं, सौंदर्य प्रसाधन (Cosmetics) और चिकित्सा उपकरण (Medical Devices) के उत्पादन को फिलहाल इस अनिवार्य डोजियर प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। सरकार का मुख्य ध्यान उन जीवन रक्षक दवाओं पर है, जिनकी गुणवत्ता में मामूली कमी भी जानलेवा साबित हो सकती है।

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