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MP Cabinet Decisions: मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव, 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र PPP मॉडल पर चलेंगे

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THE NewsBar | शुभम नांदेकर, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के तीन जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित करने की मंजूरी दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी दूर होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

डॉक्टरों और स्टाफ की कमी बनी वजह

कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए एमएसएमई मंत्री चेतन्य कश्यप ने बताया कि प्रदेश के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से 20 से अधिक बिस्तरों वाले कई केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी को देखते हुए सरकार ने रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को PPP मॉडल के तहत संचालित करने का निर्णय लिया है।

सरकार देगी भवन और दवाइयां

नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों की इमारत, आवश्यक दवाइयां और मूलभूत सुविधाएं सरकार उपलब्ध कराएगी। वहीं निजी संस्था डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य संसाधनों की व्यवस्था करेगी।

सरकार का कहना है कि निजी भागीदारों का चयन पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा और सेवा गुणवत्ता के लिए निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य होगा।

क्या है PPP मॉडल?

PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल में सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर किसी सेवा का संचालन करते हैं। इसका उद्देश्य कम समय में बेहतर प्रबंधन, आधुनिक सुविधाएं और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराना होता है। देश के कई राज्यों में स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना परियोजनाओं में इस मॉडल का उपयोग किया जा चुका है।

सरकार का दावा: बेहतर होगी स्वास्थ्य व्यवस्था

राज्य सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और अस्पतालों की कार्यक्षमता में सुधार होगा। साथ ही सरकार पर अतिरिक्त भर्ती और प्रबंधन का बोझ भी कम होगा।

विपक्ष और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता

हालांकि इस फैसले को लेकर कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विपक्षी दलों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का निजीकरण धीरे-धीरे आम लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को महंगा बना सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि अस्पतालों की निगरानी और शुल्क व्यवस्था पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहेगी तथा गरीब मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती नहीं होगी।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि PPP मॉडल पर संचालित होने वाले ये 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को कितना बेहतर बना पाते हैं।

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