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नकुलनाथ ने पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठाई, किसानों के साथ आंदोलन में हुए शामिल

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कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, फसल नुकसान पर मुआवजा देने की मांग; आगामी फसल के लिए 20 हजार रुपये प्रति एकड़ राहत, मक्का एमएसपी पर खरीद और कर्ज वसूली रोकने की उठाई आवाज

THE NewsBar | शुभम नांदेकर, पांढुर्णा।

अल्पवर्षा, भीषण जलसंकट और खरीफ फसलों के नुकसान से जूझ रहे किसानों की समस्याओं को लेकर शनिवार दोपहर पूर्व सांसद नकुलनाथ पांढुर्णा पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों के साथ जनसभा को संबोधित किया और उनकी समस्याओं से अवगत होते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। नकुलनाथ ने पांढुर्णा जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने, प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने तथा खेती-किसानी से जुड़ी अन्य समस्याओं का निराकरण करने की मांग की। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ पहले भी खड़े थे, आज भी उनके साथ हैं और आगे भी सुख-दुख में साथ निभाते रहेंगे।

अल्पवर्षा से सूख रहीं फसलें, किसानों पर कर्ज का बोझ

किसान आंदोलन को संबोधित करते हुए नकुलनाथ ने कहा कि पांढुर्णा और छिंदवाड़ा जिले के किसान इस समय गंभीर कृषि संकट का सामना कर रहे हैं। अल्पवर्षा के कारण खेतों में खड़ी खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई क्षेत्रों में फसलें सूखने की स्थिति में हैं, वहीं पानी की कमी ने आगामी फसल की तैयारी को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

उन्होंने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार करता है, लेकिन मौसम की मार से उसकी पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसके बावजूद किसानों पर बैंक ऋण की किस्तों, बिजली बिलों और खेती की लागत का बोझ बना हुआ है। ऊपर से अघोषित बिजली कटौती के कारण सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।

नकुलनाथ ने कहा कि जब किसान प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण आर्थिक संकट में फंस गए हैं, तब उन्हें राहत देने के लिए सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक राहत और आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।

पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

नकुलनाथ ने कहा कि किसानों की गंभीर समस्याओं के बावजूद पांढुर्णा जिले को अब तक सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जाना चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने किसानों की मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि प्राकृतिक परिस्थितियों से हुए नुकसान का भार अकेले किसान पर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए राहत पैकेज और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए।

किसानों की प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं

पूर्व सांसद नकुलनाथ ने जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से किसानों की विभिन्न मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • पांढुर्णा जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित किया जाए।
  • अल्पवर्षा और फसल नुकसान से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
  • आगामी फसल के लिए किसानों को कम से कम 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
  • मक्का की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाए तथा किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस दिया जाए।
  • किसानों से कर्ज वसूली पर रोक लगाई जाए, ताकि संकट की घड़ी में उन पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।
  • किसानों के बिजली बिल माफ किए जाएं।
  • खेती और सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
  • फसल नुकसान का उचित आकलन कर प्रभावित किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराई जाए।
  • किसानों की अन्य जायज समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए।

जनसभा में किसानों को दिया साथ निभाने का भरोसा

किसानों की जनसभा को संबोधित करते हुए नकुलनाथ ने कहा कि किसानों के हक, सम्मान और न्याय की लड़ाई में वे उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों की समस्याओं को शासन-प्रशासन के सामने लगातार उठाया जाएगा और उन्हें राहत दिलाने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि किसान ही संकट में रहेगा, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा। ऐसे में किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।

राहत मिलने तक संघर्ष जारी रखने का संदेश

नकुलनाथ ने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि फसल बर्बादी के बाद किसानों को आर्थिक सहायता, कर्ज से राहत और खेती के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि जब तक किसानों को उनका अधिकार और उचित राहत नहीं मिलती, तब तक उनकी आवाज बुलंद करने के प्रयास जारी रहेंगे।

पांढुर्णा में किसानों की समस्याओं को लेकर उठी यह आवाज अब सरकार के अगले कदमों पर टिकी है। किसानों को उम्मीद है कि सूखे जैसे हालात, फसल नुकसान और बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए शासन-प्रशासन शीघ्र निर्णय लेकर उन्हें राहत प्रदान करेगा।

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