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वायुसेना के लिए बिना रनवे उड़ने वाला CSAR ड्रोन तैयार होगा, दुर्गम इलाकों में करेगा रेस्क्यू ऑपरेशन

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नई दिल्ली। भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए एक अत्याधुनिक मानव रहित विमान (यूएवी) विकसित करने की योजना बनाई है, जो बिना रनवे के उड़ान भरने में सक्षम होगा। यह ड्रोन खासतौर पर कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR) मिशनों के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे युद्ध के दौरान फंसे जवानों और एयरक्रू को सुरक्षित निकाला जा सकेगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह ड्रोन पायलट वाले विमानों के जोखिम को कम करेगा और दुर्गम इलाकों, बर्फीली ऊंचाइयों तथा अग्रिम मोर्चों पर आवश्यक सामान पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह परियोजना रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत सैद्धांतिक मंजूरी प्राप्त कर चुकी है और इसे “मेक-1” श्रेणी में विकसित किया जाएगा, जिसमें 70% लागत सरकार और 30% भारतीय कंपनियां वहन करेंगी।

तकनीकी रूप से यह ड्रोन समुद्र तल से लगभग 16,000 फीट (संभावित 20,000 फीट) तक उड़ान भर सकेगा, 200 किलोमीटर तक की दूरी तय करेगा और कम से कम 45 मिनट तक हवा में स्थिर रह सकता है। इसमें चार लोगों या स्ट्रेचर सहित लगभग 400 किलोग्राम वजन ले जाने की क्षमता होगी।

इस बीच, जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बेंगलुरु स्थित केंद्र का दौरा किया और स्वदेशी प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर में उड़ान भरकर इसकी क्षमताओं का परीक्षण किया। यह हेलिकॉप्टर विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है और सेना की ताकत को और मजबूत करता है।

साथ ही, ओडिशा के गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज में एकीकृत हवाई रक्षा अभ्यास के दौरान आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों के तालमेल और हाइब्रिड खतरों से निपटने की तैयारियों का भी परीक्षण किया गया। सेना प्रमुख ने इस दौरान वायु रक्षा कर्मियों की प्रतिबद्धता और दक्षता की सराहना की।

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