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संसद में बड़ा सियासी उलटफेर: विपक्ष में बगावत से बदला लोकसभा का गणित, परिसीमन बिल के बेहद करीब पहुंचा NDA

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THE NewsBar | नई दिल्ली। देश की राजनीति ने पिछले दो हफ्तों के भीतर एक ऐसा अप्रत्याशित मोड़ ले लिया है, जिसने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। इस पूरे सियासी घटनाक्रम का सबसे बड़ा और सीधा असर संसद के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) में देखने को मिलेगा, जहां केंद्र सरकार एक बार फिर महिलाओं के आरक्षण पैकेज से जुड़े संविधान संशोधन और देश के नए परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को पारित कराने की पुरजोर तैयारी में है।

गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल के महीने में एकजुट विपक्ष की घेराबंदी के चलते लोकसभा में यह महत्वपूर्ण बिल महज 54 वोटों की कमी के कारण गिर गया था। लेकिन अब स्थितियां 180 डिग्री बदल चुकी हैं। अगर सरकार इस सत्र में बिल दोबारा लाती है, तो इसके पास होने की राह पूरी तरह आसान नजर आ रही है।

TMC और शिवसेना (उद्धव गुट) में ऐतिहासिक बगावत इस बड़े राजनीतिक बदलाव की मुख्य धुरी पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र बने हैं। बंगाल चुनाव के बाद आंतरिक कलह से जूझ रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को संसद में अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी से बगावत करते हुए अपना एक अलग गुट बना लिया है। ये बागी सांसद एक नई पार्टी ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में शामिल हो गए हैं, जो सीधे तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन को समर्थन देने जा रही है।

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना (NDA घटक दल) के साथ जाने की अंतिम तैयारी में हैं।

समझिए लोकसभा का नया अंकगणित

वर्तमान में लोकसभा की कुल 543 सीटों में से 3 सीटें खाली हैं, जिसके चलते संविधान संशोधन बिल के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 होता है।

जादुई आंकड़े से अब कितनी दूर सरकार?

  • टीएमसी के 20 और उद्धव गुट के 6 संभावित बागी सांसदों के समर्थन के बाद एनडीए का आंकड़ा 344 तक पहुंच जाता है। इसके बाद दो-तिहाई बहुमत (360) के लिए सरकार को केवल 16 वोटों की कमी रहेगी।

  • इसी बीच दक्षिण भारत से एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके (DMK) का कांग्रेस से नाता टूट चुका है और वह विपक्षी गठबंधन से अलग हो चुकी है।

  • सूत्रों के अनुसार, यदि सरकार और डीएमके के बीच बातचीत सफल रहती है, तो डीएमके के 22 सांसदों के साथ एनडीए का आंकड़ा सीधे 366 पर पहुंच जाएगा, जो कि बहुमत के आंकड़े (360) से 6 अधिक होगा। यदि डीएमके केवल वॉकआउट भी करती है, तो भी राह बेहद आसान हो जाएगी। बाकी बचे कुछ वोटों के लिए भाजपा की नजर विपक्षी गठबंधन की कुछ बेहद छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों पर टिकी है।

राज्यसभा का समीकरण भी हुआ मुफीद

उच्च सदन (Rajya Sabha) में भी दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 वोटों की आवश्यकता है, जहां फिलहाल एनडीए के पास 150 सांसद हैं।

  • यदि यहाँ भी डीएमके के 8 सांसदों का साथ सरकार को मिलता है, तो यह ग्राफ बढ़कर 158 हो जाएगा।

  • इसके बाद बहुमत के लिए बची महज 6 वोटों की कमी को टीएमसी सांसदों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर होने वाले उपचुनाव और अन्य निर्दलीय व छोटे दलों के सहयोग से आसानी से पूरा कर लिया जाएगा।

‘एक देश एक चुनाव’ का रास्ता होगा साफ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार मानसून सत्र में दोनों सदनों में यह जादुई आंकड़ा जुटा लेती है, तो परिसीमन और महिला आरक्षण बिल की न सिर्फ धमाकेदार वापसी होगी, बल्कि देश में ‘एक देश एक चुनाव’ (One Nation One Election) जैसे दूरगामी और कड़े कानूनों को धरातल पर उतारने का रास्ता भी पूरी तरह साफ हो जाएगा।

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