The NewsBar | नई दिल्ली। टाटा ग्रुप की एअर इंडिया (Air India) ने अपने विंटर शेड्यूल (अक्टूबर के अंत से प्रभावी) में रोजाना लगभग 100 उड़ानों की कटौती करने का निर्णय लिया है। एयरलाइन वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 900 फ्लाइट्स का संचालन करती है, जिसमें अब करीब 10% की कमी आएगी। इस फैसले का सबसे बड़ा असर अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रूटों पर पड़ने की संभावना है।
क्यों बंद हो रही हैं उड़ानें?
एअर इंडिया के इस कदम के पीछे दो प्रमुख कारण सामने आए हैं:
-
विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतें: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण जेट फ्यूल काफी महंगा हो गया है, जिससे एयरलाइन के परिचालन लागत (Operational Cost) में भारी बढ़ोतरी हुई है।
-
स्पेयर पार्ट्स और इंजन की कमी: एयरलाइन के पुराने बेड़े के लिए स्पेयर पार्ट्स और इंजन की वैश्विक किल्लत चल रही है। स्थिति यह है कि पुर्जों की कमी की वजह से एअर इंडिया के लगभग 30 वाइड-बॉडी विमान वर्तमान में उड़ान भरने में असमर्थ (Grounded) हैं।
डोमेस्टिक नेटवर्क पर भी पड़ेगा असर
सिर्फ अंतरराष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि घरेलू रूटों पर भी एअर इंडिया अपनी उड़ानों की संख्या (Frequency) घटाएगी। कंपनी का फोकस उन मेट्रो-टू-मेट्रो रूट्स पर है जहाँ एक ही दिन में कई फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। ऐसी जगहों पर कम यात्रियों वाली उड़ानों को मर्ज किया जाएगा या बंद किया जाएगा।
भविष्य की रणनीति: ‘क्वालिटी ओवर क्वांटिटी’
एयरलाइन ने हाल ही में बोइंग और एयरबस को 470 नए विमानों का ऐतिहासिक ऑर्डर दिया है, लेकिन उनकी डिलीवरी में अभी वक्त लगेगा। तब तक कंपनी का उद्देश्य उपलब्ध विमानों के साथ ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) को सुधारना है। उड़ानों की संख्या कम करने से एयरलाइन के पास बैकअप विमान उपलब्ध रहेंगे, जिससे उड़ानों में देरी या अचानक कैंसिलेशन की समस्या कम होगी।