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छत्रपति शिवाजी महाराज पर बयान से बवाल- बागेश्वर बाबा घिरे, रितेश देशमुख से लेकर विपक्ष तक का तीखा प्रहार

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The NewsBar | नागपुर/मुंबई।  छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए बयान के बाद (बागेश्वर बाबा) विवादों में घिर गए हैं। उनके एक कथित बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति और समाज में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। मराठी समाज, राजनीतिक दलों और फिल्मी हस्तियों ने इस टिप्पणी को “भ्रामक” और “असम्मानजनक” बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।


क्या था पूरा बयान?

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पं.धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि शिवाजी युद्ध लड़ते-लड़ते थक गए थे और उन्होंने अपना मुकुट उतारकर रामदास स्वामी को सौंप दिया था।
इस कथन के सामने आते ही इतिहासकारों और राजनीतिक नेताओं ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत बताया और कड़ी प्रतिक्रिया दी।


रितेश देशमुख का तीखा पलटवार

अभिनेता , जो अपनी फिल्म राजा शिवाजी में छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका निभा रहे हैं, ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “हमारे पूजनीय नायक के बारे में विकृत बातें करना अस्वीकार्य है।”
उन्होंने आगे कहा कि शिवाजी महाराज की विरासत को कोई भी कमजोर नहीं कर सकता—यह नाम सदियों तक अमर रहेगा।


राजनीति में घमासान

इस विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति को भी गरमा दिया है।

  • (शिवसेना-यूबीटी) ने सवाल उठाया कि कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने तुरंत विरोध क्यों नहीं किया।
  • उन्होंने कहा कि “शिवाजी महाराज के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना अस्वीकार्य है।”
  • कांग्रेस नेता ने भी बयान को “अपमानजनक” बताया और पूछा कि क्या बागेश्वर बाबा ने शिवाजी महाराज का इतिहास पढ़ा है।
  • राकांपा (शरद पवार गुट) के नेताओं ने तो यहां तक मांग कर दी कि महाराष्ट्र में बागेश्वर बाबा के कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाया जाए और उनसे माफी मांगी जाए।

सरकार पर भी उठे सवाल

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जिस मंच से यह बयान दिया गया, वहां मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन किसी ने तत्काल आपत्ति नहीं जताई।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ने कहा कि
“ऐसी किसी घटना का कोई दस्तावेजी ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोककथाओं और वास्तविक इतिहास में अंतर समझना जरूरी है।


बागेश्वर बाबा की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य शिवाजी महाराज का अपमान करना नहीं था।
उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और उन्होंने सिर्फ शिवाजी महाराज की “संत-तुल्य भावना और समर्पण” की बात कही थी।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग जानबूझकर संतों और सनातन परंपरा को बदनाम करने की कोशिश करते हैं।


इतिहास बनाम बयान: क्यों बढ़ा विवाद?

इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज का पूरा जीवन संघर्ष, स्वराज की स्थापना और बेहतरीन युद्ध रणनीति का प्रतीक रहा है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और मराठा साम्राज्य को मजबूत किया।

इसी वजह से जब यह कहा गया कि वे युद्ध से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, तो इस पर सवाल उठने लगे। इतिहास के विश्वसनीय दस्तावेजों, किताबों और प्रमाणों में ऐसी किसी घटना का उल्लेख नहीं मिलता।

यही कारण है कि कई लोगों और इतिहासकारों ने इस बयान को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया। उनका मानना है कि महान ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बारे में बोलते समय प्रमाणित इतिहास और लोककथाओं के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है।

विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि जो बात कही गई, वह इतिहास में साबित नहीं है और शिवाजी महाराज की स्थापित छवि से मेल नहीं खाती।


छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर टिप्पणी हमेशा संवेदनशील मुद्दा रही है। बागेश्वर बाबा के बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि लोककथाओं, व्यक्तिगत व्याख्याओं और प्रमाणित इतिहास के बीच अंतर को समझना कितना जरूरी है।
फिलहाल विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और राजनीतिक रूप ले सकता है।

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