THE NewsBar | शुभम नांदेकर, भोपाल/दिल्ली। मध्य प्रदेश की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ी हलचल के बीच कांग्रेस ने एक अहम रणनीतिक फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री को राज्यसभा भेजने पर सहमति बना ली है। यह फैसला दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें , और शामिल रहे।

दिल्ली बैठक में बनी रणनीति
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की मौजूदगी में हुई बैठक में मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव को लेकर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग न हो। इसके लिए मजबूत और सर्वमान्य चेहरे पर सहमति जरूरी मानी गई, जिस पर अंततः कमलनाथ का नाम आगे आया।
‘सिंगल नाम’ पर एकजुटता
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर संभावित दावेदारों के बीच असमंजस की स्थिति को खत्म करने के लिए ‘सिंगल नाम’ की रणनीति अपनाई गई। इस पर , और ने सहमति जताई। इससे पार्टी के भीतर एक स्पष्ट संदेश गया है कि कांग्रेस इस चुनाव को पूरी एकजुटता के साथ लड़ना चाहती है।
कमलनाथ पर दांव क्यों?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि को राज्यसभा भेजने का फैसला केवल अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखकर लिया गया है। कमलनाथ को ‘मैनेजमेंट गुरु’ माना जाता है, जो जटिल राजनीतिक परिस्थितियों में भी समीकरण साधने में सक्षम हैं।
उनकी पकड़ न सिर्फ कांग्रेस संगठन में मजबूत मानी जाती है, बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं के साथ भी उनके संबंध प्रभावी बताए जाते हैं। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व को भरोसा है कि वे क्रॉस वोटिंग जैसी स्थिति को संभाल सकते हैं।
एमपी कांग्रेस अलर्ट मोड में
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव का ऐलान कभी भी हो सकता है। ऐसे में भोपाल से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस की गतिविधियां तेज हो गई हैं। हाल ही में बदले राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
दिल्ली में हुई इस बैठक को इसी रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं ने एकजुटता का संदेश देने के साथ-साथ चुनावी गणित को साधने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
बड़ा संदेश: एकता और रणनीति
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने यह साफ संकेत दिया है कि वह राज्यसभा चुनाव को हल्के में नहीं ले रही है। के नाम पर बनी सहमति न केवल पार्टी की एकजुटता दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कांग्रेस इस बार ‘मैनेजमेंट और अनुभव’ के दम पर सियासी बाजी जीतने की तैयारी में है।