THE NewsBar | भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में जनकल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने प्रदेश के समग्र विकास के लिए 21,485 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की। इनमें सबसे बड़ी राहत ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों संपत्ति धारकों को मिली है, जिनकी संपत्तियों का पंजीयन अब सरकार अपने खर्च पर कराएगी।
48.32 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री, सरकार उठाएगी 3800 करोड़ का भार
कैबिनेट ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 को मंजूरी देते हुए ऐतिहासिक निर्णय लिया है। योजना के तहत स्वामित्व योजना में तैयार किए गए अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाएगा, जिससे ग्रामीण नागरिक अपनी संपत्तियों के आधार पर बैंक ऋण प्राप्त कर सकेंगे।
प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। इन संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए नागरिकों को न स्टाम्प शुल्क देना होगा और न ही पंजीयन शुल्क। पूरी 3800 करोड़ रुपये की लागत राज्य सरकार वहन करेगी।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण परिवारों को मकान निर्माण, कृषि कार्य और छोटे व्यवसायों के लिए आसानी से ऋण मिल सकेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
देश में पहला मॉडल बनेगा मध्यप्रदेश
ड्रोन तकनीक के माध्यम से तैयार किए गए स्वामित्व अभिलेखों को कानूनी मान्यता देने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। योजना की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। जनजागरूकता और प्रचार-प्रसार के लिए अलग से 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र को सबसे बड़ा बजट, 17 हजार करोड़ से अधिक की मंजूरी
कैबिनेट ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगभग 17,059 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी।
मुख्य फैसले:
- मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों के संचालन के लिए 14,363.95 करोड़ रुपये।
- पीजी मेडिकल शिक्षा के विस्तार हेतु 657 करोड़ रुपये।
- उज्जैन, सिवनी, छतरपुर, दमोह और बुदनी में नए मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण के लिए 1200 करोड़ रुपये।
- एमबीबीएस सीटों में वृद्धि और अधोसंरचना विकास के लिए 838 करोड़ रुपये।
इन फैसलों से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा और ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी।
सरकारी स्कूलों में समय पर मिलेगी सिली-सिलाई यूनिफॉर्म
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही दो जोड़ी सिली-सिलाई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी।
सत्र 2026-27 से यह व्यवस्था निविदा प्रक्रिया के माध्यम से लागू होगी और इसकी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपी गई है। सरकार का उद्देश्य समय पर गुणवत्तापूर्ण गणवेश उपलब्ध कराना है।
पंचायत और राजस्व कानूनों में संशोधन का रास्ता साफ
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 (संशोधन) अध्यादेश-2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। साथ ही मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश-2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे स्वामित्व योजना और संपत्ति पंजीयन से जुड़े प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रावधानों को मजबूत किया जा सकेगा।
इंदौर जिला न्यायालय भवन की लागत बढ़ी
निर्माणाधीन पिपल्याहाना जिला न्यायालय भवन, इंदौर की लागत को संशोधित करते हुए 411 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 626.61 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
दो फिल्मों को एसजीएसटी में छूट
कैबिनेट ने अभिनेता-निर्देशक द्वारा निर्देशित फिल्म तथा को मध्यप्रदेश में प्रदर्शन के दौरान एसजीएसटी के बराबर राशि की छूट देने के निर्णय का अनुमोदन किया।
बरगी क्रूज हादसे की न्यायिक जांच को मंजूरी
कैबिनेट ने में 30 अप्रैल 2026 को हुई क्रूज दुर्घटना की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग को भी अनुमोदन प्रदान किया।
क्या है सबसे बड़ा संदेश?
मोहन सरकार के इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों परिवारों को पहली बार अपनी संपत्ति का विधिवत पंजीकृत स्वामित्व मिलेगा। इससे बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों तक उनकी पहुंच आसान होगी। वहीं स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश के जरिए सरकार ने विकास और जनकल्याण दोनों पर समान फोकस का संदेश दिया है।