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जुड़वां बच्चों के पिता निकले अलग-अलग, अमेरिका के कोलंबिया में सामने आया दुनिया का 20वां दुर्लभ मामला

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कोलंबिया। आज के आधुनिक युग में भी कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जो विज्ञान और तर्क को पीछे छोड़ देती हैं। अमेरिका के कोलंबिया से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। यहाँ एक महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, लेकिन जब उनका डीएनए (DNA) टेस्ट कराया गया, तो पता चला कि दोनों बच्चों के जैविक पिता अलग-अलग हैं। मेडिकल साइंस में इस दुर्लभ स्थिति को ‘हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन’ (Heteropaternal Superfecundation) कहा जाता है।

डीएनए रिपोर्ट ने उड़ाए होश

मामले का खुलासा तब हुआ जब पिता को बच्चों के पितृत्व (Paternity) पर संदेह हुआ। इसके बाद कोलंबिया नेशनल यूनिवर्सिटी की ‘लेबोरेटरी ऑफ पॉपुलेशन जेनेटिक्स एंड आइडेंटिफिकेशन’ में जांच कराई गई। रिसर्चर्स ने पाया कि बच्चों के ‘Y’ क्रोमोसोम दो अलग-अलग पुरुषों से मैच कर रहे थे। इस रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी कि महिला एक ही समय में दो अलग-अलग पुरुषों के स्पर्म से प्रेग्नेंट हुई थी।

क्या है हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन?

डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति तब पैदा होती है जब:

  • डबल ओव्यूलेशन: आमतौर पर एक महिला के ओव्यूलेशन पीरियड के दौरान एक ही अंडा (Egg) रिलीज होता है। लेकिन इस दुर्लभ स्थिति में महिला का शरीर दो अंडे रिलीज कर देता है।

  • समय का अंतराल: यदि महिला बहुत कम समय के अंतराल में दो अलग-अलग पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाती है, तो दोनों अंडे अलग-अलग स्पर्म से फर्टिलाइज हो सकते हैं।

  • स्पर्म की उम्र: विशेषज्ञों का कहना है कि स्पर्म महिला के शरीर में कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं, जिससे यह दुर्लभ प्रक्रिया सफल हो जाती है।

दुनिया में अब तक सिर्फ 20 मामले

कोलंबिया नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के अनुसार, यह मामला मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी चुनौती है। वैश्विक स्तर पर अब तक ऐसे केवल 20 पुख्ता मामले ही रिकॉर्ड में दर्ज हैं। यह स्थिति जितनी हैरान करने वाली है, उतनी ही दुर्लभ भी है, क्योंकि इसके लिए कई जैविक संयोगों का एक साथ होना जरूरी है।

विशेषज्ञों की राय

जेनेटिक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इंसानी शरीर की जटिलता और प्रजनन क्षमता के अनछुए पहलुओं को उजागर करती है। हालांकि यह सामाजिक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह ‘सुपरफेकंडेशन’ का एक पाठ्यपुस्तक उदाहरण है।

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