THE NewsBar | नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आज यानी 14 मई 2026 का दिन चिंताजनक आंकड़े लेकर आया है। वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Ministry) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर (WPI) उछलकर 8.30% पर पहुंच गई है। यह पिछले 42 महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। इससे पहले मार्च में यह दर महज 3.88% थी, यानी एक महीने में ही महंगाई दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई है।
ईरान-अमेरिका तनाव और $100 के पार कच्चा तेल
महंगाई में इस अप्रत्याशित उछाल की सबसे बड़ी वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है।
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क्रूड ऑयल का झटका: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।
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सप्लाई चेन प्रभावित: युद्ध के डर से लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर थोक कीमतों पर दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा चला, तो महंगाई के आंकड़े दहाई (Double digit) तक पहुंच सकते हैं।
सेक्टर-वाइज महंगाई का गणित (अप्रैल 2026)
वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग हर सेक्टर में महंगाई की मार पड़ी है:
| कैटेगरी | मार्च दर | अप्रैल दर |
| ईंधन और बिजली (Fuel & Power) | 1.05% | 24.71% |
| प्राइमरी आर्टिकल्स (जरूरी सामान) | 6.36% | 9.17% |
| मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स | 3.39% | 4.62% |
| खाद्य सूचकांक (Food Index) | 1.85% | 1.98% |
ईंधन और पावर की कीमतों में 24 गुना उछाल
आंकड़ों में सबसे डराने वाली बात ‘ईंधन और बिजली’ की महंगाई है, जो मार्च में महज 1.05% थी और अब बढ़कर 24.71% हो गई है। इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों को चलाने, माल ढोने और बिजली उत्पादन की लागत में भारी इजाफा हुआ है। इसी तरह रोजाना जरूरत के सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई दर भी 9% के पार पहुंच गई है, जो आम आदमी की रसोई पर सीधा हमला है।