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“राहुल गांधी की चेतावनियां फिर चर्चा में” – आर्थिक संकट को लेकर बयान के बाद छिड़ी नई बहस

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कोविड, बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक दबाव को लेकर राहुल गांधी की पुरानी चेतावनियां फिर चर्चा में, समर्थकों ने कहा -“जो कहा, वही अब दिख रहा”

THE NewsBar | शुभम नांदेकर, नई दिल्ली।  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi द्वारा देश में “बड़े आर्थिक तूफ़ान” की चेतावनी देने के बाद राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi सरकार ने पिछले वर्षों में ऐसा आर्थिक ढांचा तैयार किया, जिसका सबसे अधिक फायदा चुनिंदा उद्योगपतियों Gautam Adani और Mukesh Ambani को मिला, जबकि आम जनता पर संकट का बोझ बढ़ता गया।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने जिन आर्थिक और सामाजिक संकटों को लेकर चेतावनी दी थी, उनमें से कई बाद में वास्तविकता बनकर सामने आए।

कोविड-19 महामारी की शुरुआत के दौरान मार्च 2020 में राहुल गांधी ने कोरोना को “सुनामी” जैसा खतरा बताते हुए कहा था कि यदि समय रहते तैयारी नहीं हुई तो भारत को भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान उठाना पड़ेगा। बाद में देशव्यापी लॉकडाउन, रोजगार संकट और आर्थिक गिरावट ने उनकी आशंकाओं को चर्चा में ला दिया।

मई 2020 में राहुल गांधी ने “आर्थिक तूफ़ान” और “इकोनॉमिक सुनामी” की चेतावनी देते हुए कहा था कि सिर्फ बड़े पैकेज घोषित करने से नहीं, बल्कि सीधे जनता के हाथ में पैसा पहुंचाने से अर्थव्यवस्था संभलेगी। उसी दौरान देश में छोटे उद्योग, व्यापार और रोजगार पर भारी असर देखने को मिला।

राहुल गांधी लगातार यह भी कहते रहे कि छोटे और मध्यम उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है, बैंकिंग सेक्टर संकट में जा सकता है और बेरोजगारी राष्ट्रीय संकट बनेगी। हाल के वर्षों में बढ़ती बेरोजगारी, MSME सेक्टर की चुनौतियां और महंगाई को लेकर उनकी पुरानी टिप्पणियां फिर चर्चा में आ गई हैं।

हाल ही में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनावों के बीच राहुल गांधी ने फिर दावा किया कि देश कठिन आर्थिक दौर की ओर बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी भारत पर बढ़ते आर्थिक दबाव, तेल संकट और महंगाई की आशंकाओं का जिक्र किया गया है।

हालांकि भाजपा ने राहुल गांधी के इन दावों को “निराधार” बताते हुए कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और विपक्ष केवल डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थक यह तर्क दे रहे हैं कि राहुल गांधी ने समय-समय पर जिन मुद्दों को उठाया, वे बाद में राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बने।

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