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मध्यप्रदेश में संविदा शिक्षकों को बड़ी सौगात: सरकारी भर्तियों में मिलेगा 50% आरक्षण, उम्र सीमा में भी भारी छूट

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THE NewsBar | भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के संविदा शिक्षकों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित भर्तियों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस निर्णय से प्रदेश के हजारों संविदा शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित होने की उम्मीद जगी है। सरकार ने इसके लिए सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन कर दिए हैं, जिससे अब संविदा कर्मियों का नियमित कैडर में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।

पात्रता और नए नियम

सरकार द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार, इस आरक्षण का लाभ केवल उन संविदा कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने कम से कम एक वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली है। हालांकि, प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि 50% कोटे का यह लाभ केवल पहली नियमित नियुक्ति के समय ही दिया जाएगा। इसके बाद की पदोन्नति या अन्य भर्तियों में यह लागू नहीं होगा। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रतियोगिता के स्तर से कोई समझौता नहीं किया जाएगा; संविदा कर्मचारियों को भी निर्धारित प्रतियोगी परीक्षा पास करनी होगी।

आयु सीमा में 55 वर्ष तक की राहत

आरक्षण के साथ-साथ सरकार ने संविदा कर्मचारियों को अधिकतम आयु सीमा में भी बड़ी राहत दी है। संविदा सेवा के वर्षों को आधार मानकर अभ्यर्थी अब 55 वर्ष की आयु तक नियमित भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे। लेकिन इसमें एक तकनीकी शर्त जोड़ी गई है: आयु सीमा में यह छूट केवल उसी विभाग में आवेदन करने पर मिलेगी जिसमें कर्मचारी वर्तमान में संविदा पर कार्यरत है। दूसरे विभागों की भर्ती में सामान्य आयु नियम ही लागू होंगे।

आरक्षण की स्थिति और कर्मचारी संघ की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संविदा कर्मियों को मिलने वाला यह 50% आरक्षण, पूर्व से लागू SC, ST, OBC और EWS आरक्षण के नियमों को प्रभावित नहीं करेगा। वे नियम यथावत रहेंगे और जरूरत पड़ने पर बैकलॉग पदों को नियमों के तहत डी-रिजर्व करने का प्रावधान भी रखा गया है। संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संघ पिछले कई वर्षों से इस 50% कोटे की मांग कर रहा था और सरकार के इस फैसले से वर्षों पुराना संघर्ष अब सफल हुआ है।

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