THE NewsBar | शुभम नांदेकर, पांढुर्णा/सौंसर
मध्यप्रदेश के पांढुर्णा जिले के बोरगांव रेमंड गांव से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शादी समारोह की खुशियां अचानक दहशत और अफरा-तफरी में बदल गईं। नागपुर गई एक बारात में शामिल करीब 250 लोगों को एहतियातन एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पड़े, जबकि 100 से अधिक बाराती फूड पॉइजनिंग का शिकार होकर अस्पताल पहुंच गए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।
कुत्ते के काटने वाली गाय के दूध से बना मही परोसने का आरोप
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गांव की एक गाय को करीब एक सप्ताह पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। इसके बावजूद परिजनों द्वारा गाय का दूध निकालना जारी रखा गया। बताया जा रहा है कि इसी दूध से शादी समारोह के लिए मही (मट्ठा) तैयार किया गया था, जिसे बारातियों और मेहमानों को परोसा गया।
मंगलवार को अचानक गाय की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद गांव में यह खबर फैल गई कि बारात में परोसा गया मही उसी गाय के दूध से बनाया गया था। सूचना फैलते ही शादी समारोह में शामिल लोगों के बीच डर और हड़कंप मच गया। कई लोगों ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, गांव में लगाया गया कैंप
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम तुरंत गांव पहुंची और जांच शुरू कर दी। एहतियातन बारात में शामिल करीब 250 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। साथ ही सभी बारातियों और ग्रामीणों को निगरानी में रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी में रेबीज जैसे लक्षण सामने नहीं आए हैं, लेकिन सुरक्षा के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
दावत का खाना बना बीमारी की वजह
इसी शादी समारोह से जुड़ा एक और मामला सामने आया, जहां बारात में परोसे गए भोजन ने भी लोगों की तबीयत बिगाड़ दी। जानकारी के मुताबिक, बोरगांव रेमंड के मोहखेड़े परिवार की बारात नागपुर गई थी। वहां स्वागत समारोह और भोजन के दौरान बड़ी संख्या में मेहमानों ने दही-बड़े और गुलाब जामुन खाए।
कुछ ही देर बाद लोगों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत शुरू हो गई। देखते ही देखते शादी का पंडाल अस्पताल जैसा माहौल बन गया। कई लोग वहीं बेसुध हो गए, जबकि कुछ को तुरंत अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
100 से ज्यादा लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार
बताया जा रहा है कि इस समारोह में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों से मेहमान शामिल हुए थे। फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखाई देने के बाद लोग अपने-अपने क्षेत्रों में लौटे और स्थानीय अस्पतालों में इलाज कराया।
सौंसर सिविल अस्पताल सहित आसपास के अस्पतालों में करीब 100 से अधिक मरीज पहुंचे। बोरगांव क्षेत्र के लगभग 30 मरीजों का इलाज सौंसर के सिविल अस्पताल में किया गया।
डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा, सभी मरीज खतरे से बाहर
बीएमओ डॉ. रुपेश बोकडे के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने तुरंत उपचार शुरू किया। डॉक्टरों की निगरानी और समय पर इलाज मिलने से सभी मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। किसी भी मरीज की स्थिति गंभीर नहीं है।
अस्पताल प्रशासन ने सभी मरीजों को ऑब्जर्वेशन में रखा है और खान-पान से संबंधित सैंपल भी जांच के लिए भेजे जाने की तैयारी की जा रही है।
अस्पताल पहुंचे विधायक और पूर्व मंत्री
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक विजय चौरे और पूर्व मंत्री नाना भाऊ मोहोड़ सौंसर सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भर्ती मरीजों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दोनों नेताओं ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और सार्वजनिक आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता तथा स्वच्छता को लेकर सख्त नियमों का पालन होना चाहिए।
खान-पान की व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने शादी समारोहों और सार्वजनिक आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और लापरवाही किस तरह बड़े खतरे में बदल सकती है, यह घटना उसका बड़ा उदाहरण बन गई है।
फिलहाल राहत की बात यह है कि समय रहते इलाज मिलने से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने शादी की खुशियों को डर और चिंता में जरूर बदल दिया।