अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी का एलान किया। ईरान की IRGC ने जवाब में कहा कि स्ट्रेट पर उनका पूरा नियंत्रण है। इसी बीच इजरायल ने युद्ध की तैयारी फिर एक बार शुरू कर दी है।
IRGC ने ट्रंप को दिया जवाब
- अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल; ट्रंप ने होर्मुज नाकाबंदी का आदेश दिया।
- ईरान के IRGC ने होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया, अमेरिका को चेतावनी दी।
- अमेरिका ने फारस की खाड़ी में नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाई, विमानवाहक पोत तैनात।
- इजरायल युद्ध की तैयारी में; रूस ने मध्यस्थता की पेशकश की।
- विशेषज्ञों ने नाकाबंदी से क्षेत्रीय तनाव, वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रभाव की चेतावनी दी।
[The NewsBar] डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति-वार्ता पूरी तरह से विफल हो गई है। इस हाई-लेवल मीटिंग के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपनी नौसेना को होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी करने का निर्देश दिया था।
ट्रंप के इस एलान के बाद अब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की तरफ से बयान सामने आया है। IRGC ने ट्रंप को जवाब देते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की सेना का पूरा कंट्रोल है।
IRGC ने ट्रंप को दिया जवाब
IRGC की नौसेना कमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘ट्रंप के इस जलमार्ग पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का आदेश दिए जाने के बाद, ईरानी सुरक्षा बलों का होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण है।
आईआरजीसी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल होने की बात के साथ ही अमेरिका को चेतावनी भी दी। ईरानी सेना ने पोस्ट में लिखा, ‘कोई भी गलत कदम दुश्मन को जलडमरूमध्य के जानलेवा भंवरों में फंसा देगा।’
ट्रंप ने होर्मुज में नाकाबंदी का किया एलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट शेयर करते हुए दावा किया कि अमेरिका, ईरान की होर्मुज पर पकड़ को खत्म कर सकता है।
ऐसा ही अमेरिकी नौसेना ने पिछले साल वेनेजुएला के समुद्र में किया था। इससे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना के पास इस रणनीतिक जलमार्ग में आवाजाही को नियंत्रित करने की क्षमता है।

इजरायल युद्ध के लिए तैयार
अमेरिका और ईरान के बीच शांति-वार्ता के विफल होने के बाद इजरायल ने अपनी सेना से फिर एक बार युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली सेना प्रमुख ने अपने सैनिकों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे ईरान के साथ फिर से युद्ध शुरू होने की स्थिति के लिए तैयार रहें।
मध्यस्थता के लिए तैयार रूस
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आज रविवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से टेलीफोन पर बातचीत की। इंटरफैक्स समाचार एजेंसी के अनुसार, पुतिन ने कहा कि रूस मिडिल ईस्ट में स्थायी समाधान के लिए अपनी सुविधा प्रदान करने के प्रयासों को जारी रखने के लिए तैयार है।
US के एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात
विशेषज्ञों के अनुसार, फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य तैनाती पहले से मजबूत हो चुकी है। यूएसएस जेराल्ड फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक पोत क्षेत्र में मौजूद हैं, जिससे अमेरिका की समुद्री निगरानी और नियंत्रण क्षमता और बढ़ गई है।
US के एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात
विशेषज्ञों के अनुसार, फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य तैनाती पहले से मजबूत हो चुकी है। यूएसएस जेराल्ड फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक पोत क्षेत्र में मौजूद हैं, जिससे अमेरिका की समुद्री निगरानी और नियंत्रण क्षमता और बढ़ गई है।
लेंग्जीगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी नौसेना के लिए यह बहुत आसान होगा कि वह तय करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कौन-सा जहाज गुजर सकता है और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि 24 घंटे में होर्मुज से 10 जहाज गुजरे हैं, जिसमें एक रूसी झंडे वाला तेल टैंकर भी शामिल था। इसके अलावा कार्गो जहाज भारत और चीन के लिए भी निकले हैं।
अगर ईरान अड़ियल रवैया अपनाता है तो होर्मुज के बाहर अमेरिकी नौसेना के पहरे से उस जलमार्ग से आने-जानेवाली हर चीज पर नजर रखी जा सकती है। इसके बाद आप खार्ग द्वीप या ओमान के पास से उस संकरे हिस्से से आगे जाना चाहते हैं तो आपको अमेरिकी नौसेना की अनुमति लेनी होगी। हालांकि, जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
हालिया घटनाओं में अमेरिकी युद्धपोतों की आवाजाही और माइन साफ करने के अभियान ने क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं, जबकि ईरान ने किसी भी हस्तक्षेप पर कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी का विकल्प अपनाता है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।