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भारत पर तेल संकट के गहराते बादल, बैकअप खत्म होने की कगार – ईरान से सप्लाई भी रुकी

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The NewsBar | नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित आवाजाही के चलते भारत समेत एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर तेल संकट का खतरा मंडराने लगा है। कच्चे तेल की आपूर्ति लगातार प्रभावित हो रही है और देश का रणनीतिक भंडार (बफर स्टॉक) भी तेजी से घट रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती दौर में भारत और चीन ने समुद्र में मौजूद कार्गो, रूस से अतिरिक्त खरीद और अस्थायी इंतजामों के जरिए हालात संभाल लिए थे, लेकिन अब ये विकल्प लगभग समाप्त हो चुके हैं। स्थिति यह है कि रिफाइनरियों के पास तुरंत कच्चा तेल खरीदने के सीमित विकल्प ही बचे हैं।

⚠️ अस्थायी राहत खत्म, संकट गहराया

ऑयल ब्रोकरेज से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, समुद्र में स्टोर किए गए रूसी कच्चे तेल (फ्लोटिंग स्टोरेज) की मात्रा फरवरी के मध्य में करीब 20 मिलियन बैरल थी, जो अब घटकर 5 मिलियन बैरल से भी कम रह गई है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है और रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है।

⛽ LPG और डीजल पर सीधा असर

भारत की निर्भरता खाड़ी देशों पर होने के कारण रसोई गैस (LPG) और डीजल की सप्लाई पर भी असर दिखने लगा है। होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय टैंकरों पर हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में खाली जहाज भेजने की योजना रोक दी गई है।
ऐसे में 4 साल बाद देश में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। कमजोर रुपया और महंगा आयात, महंगाई को और बढ़ा सकता है।

🚫 ईरानी तेल का विकल्प भी बंद

भारत के लिए ईरान से तेल आयात की राह भी लगभग बंद हो चुकी है। अमेरिका की ओर से मिली अस्थायी छूट समाप्त होने के बाद प्रतिबंध दोबारा लागू हो गए हैं, जिससे ईरानी तेल की सप्लाई रुक गई है।

🌍 वैश्विक स्तर पर भी असर

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुमान के मुताबिक, होर्मुज संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 10% तक गिरावट दर्ज की गई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर साफ दिख रहा है।

📈 विकल्प कम, कीमतें ज्यादा

अब वह तेल भी प्रीमियम कीमतों पर मिल रहा है जो पहले सस्ते में उपलब्ध था, जिसमें रूसी तेल भी शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संकट लंबा चला, तो भारत को घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए तेल निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। साथ ही अमेरिका से आयात बढ़ाना एक बड़ा विकल्प बन सकता है।


तेल आपूर्ति में लगातार बाधा, घटता बफर स्टॉक और सीमित विकल्प भारत के लिए चिंता बढ़ा रहे हैं। अगर होर्मुज संकट जल्द नहीं सुलझा, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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