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नासा का नया मिशन, 2028 तक चांद पर उतरेंगे इंसान

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अमेरिका। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भविष्य के लिए अपनी नई अंतरिक्ष रणनीति के तीन मुख्य स्तंभों की घोषणा की है। नासा के प्रशासक जेरेड आइजकमैन के अनुसार, एजेंसी का सबसे बड़ा लक्ष्य 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारना है। यह मिशन केवल लैंडिंग तक सीमित नहीं रहेगा। नासा वहां एक स्थायी बेस बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए निजी कंपनियों के साथ मिलकर लैंडर, रोवर और पावर सिस्टम जैसी तकनीक विकसित की जा रही है।

निजी भागीदारी और बजट की चुनौतियां

नासा की नई योजना का दूसरा अहम हिस्सा लो-अर्थ ऑर्बिट में व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार करना है। एजेंसी अब सैटेलाइट लॉन्च और पृथ्वी के अवलोकन जैसे कार्यों के लिए निजी कंपनियों पर अधिक निर्भर रहेगी। हालांकि, इस रणनीति को लेकर अमेरिकी सांसदों ने चिंता जताई है। प्रस्तावित बजट में लगभग 23 प्रतिशत की कटौती की गई है। सांसदों का मानना है कि कम फंडिंग से चीन के साथ स्पेस रेस में अमेरिका पिछड़ सकता है। आइजकमैन ने भरोसा दिलाया है कि कम संसाधनों में भी फोकस्ड निवेश के जरिए बेहतर परिणाम हासिल किए जाएंगे।

डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन पर मुख्य फोकस

नासा अब महंगे प्रोजेक्ट्स के बजाय परिणाम देने वाले छोटे और सटीक मिशनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। आर्टेमिस कार्यक्रम के माध्यम से एजेंसी 1972 के बाद पहली बार मानव मौजूदगी को चंद्रमा पर स्थापित करना चाहती है। नई रणनीति के तहत नासा अपना पूरा ध्यान डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन और न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसे जटिल तकनीकी क्षेत्रों पर लगाएगा। आइजकमैन ने स्पष्ट किया कि लॉन्च की संख्या बढ़ाकर और खर्चों में पारदर्शिता लाकर अमेरिका अंतरिक्ष में अपनी वैश्विक लीडरशिप को बरकरार रखेगा।

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