The NewsBar | जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अलर्ट सामने आया है। बच्चों को दी जाने वाली पैरासिटामोल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन (125 mg/5ml) के एक विशेष बैच को जांच में अमानक पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसके उपयोग और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हैरानी की बात यह है कि इस दवा का सैंपल नवंबर 2024 में जांच के लिए भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट करीब डेढ़ साल बाद अप्रैल 2026 में प्राप्त हुई।
⚠️ कौन सा बैच हुआ फेल?
- दवा का नाम: पैरासिटामोल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन (125 mg/5ml)
- कंपनी: मेसर्स जेनिथ ड्रग्स लिमिटेड, इंदौर
- बैच नंबर: 41507
- निर्माण तिथि: नवंबर 2024
- एक्सपायरी: अक्टूबर 2026
🔬 जांच में क्या मिली गड़बड़ी?
भोपाल की सरकारी ड्रग टेस्टिंग लैब में जांच के दौरान इस बैच की दवा को तय मानकों पर खरा नहीं पाया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी के अनुसार, दवा में कण (particles) पाए गए हैं।
सामान्य भाषा में इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे चाशनी में छोटे-छोटे दाने या थक्के बन जाते हैं, जबकि इस तरह की दवा पूरी तरह एकसमान (uniform) होनी चाहिए।
हालांकि, राहत की बात यह है कि:
- दवा की प्रभावशीलता (potency) में कोई कमी नहीं मिली
- किसी जहरीले या हानिकारक तत्व की पुष्टि नहीं हुई
🏥 तत्काल कार्रवाई
रिपोर्ट सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया:
- जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और क्लीनिक्स को इस बैच का उपयोग तुरंत बंद करने के निर्देश
- जहां भी दवा उपलब्ध है, वहां से स्टॉक वापस लेने के आदेश
- यह जांच जारी कि कितनी दवा वितरित हो चुकी है
❗ देरी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल जांच रिपोर्ट में हुई डेढ़ साल की देरी को लेकर उठ रहा है। इतने लंबे समय तक यह दवा बच्चों को दी जाती रही, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
👨👩👧👦 अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है:
- घबराने की जरूरत नहीं, यह सावधानी के तौर पर उठाया गया कदम है
- अगर आपके घर में Batch No. 41507 की यह सिरप है, तो इसका उपयोग न करें
- नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र को इसकी जानकारी दें
ℹ️ क्यों आई समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, दवा में कण बनने की वजह हो सकती है:
- भंडारण (storage) में गड़बड़ी
- निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी खामी
👉 यह मामला दवा की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग सिस्टम दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई कर जोखिम को कम करने की कोशिश की है, लेकिन भविष्य में ऐसी देरी न हो, यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा।